उत्तराखंड के पंचायत चुनाव पर ‘सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला’ : राज्य निर्वाचन आयोग पर दो लाख का जुर्माना,याचिका खारिज
दो वोटर लिस्ट में प्रत्याशियों के नाम की प्रविष्टि वाले मामले में जबरदस्त झटका
नई दिल्ली/ देहरादून। संपन्न पंचायत चुनाव के दौरान समूचे उत्तराखंड में अच्छी खासी सुर्खियां बटोरने वाले, डबल वोटर लिस्ट में नाम से संबंधित मामले में राज्य निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट से जबरदस्त झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने डबल वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने के बावजूद प्रत्याशियों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने संबंधी राज्य चुनाव आयोग के सर्कुलर पर , नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती देने वाली राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका बीते रोज खारिज कर दी तथा राज्य निर्वाचन आयोग पर 2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वो इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं है। ज्ञात हो कि उपरोक्त याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नैनीताल हाई कोर्ट के 11 जुलाई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य की कई मतदाता सूचियों में नाम वाले उम्मीदवारों ;डबल वोटर लिस्टद्ध को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति देने वाले स्पष्टीकरण परिपत्र ;सर्कुलरद्ध पर रोक लगाई गई थी। याद दिलाना होगा कि उत्तराखंड में संपन्न हाल में ही संपन्न पंचायत चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग ने दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वाले व्यक्ति को मतदान करने और चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी तथा इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से स्पष्टीकरण देते हुए एक सर्कुलर भी जारी किया गया था। इस सर्कुलर को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने पर हाईकोर्ट की ओर से स्पष्टीकरण परिपत्र पर रोक का आदेश पारित कर दिया गया था ।जिसे राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी ।सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की याचिका खारिज करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील से पूछा कि आप वैधानिक प्रावधान के विपरीत फैसला कैसे दे सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि यह स्पष्टीकरण प्रथम दृष्टया उल्लेखित वैधानिक प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कानून स्पष्ट रूप से एक से ज्यादा प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों या एक से अधिक मतदाता सूची में मतदाता के पंजीकरण को प्रतिबंधित करता है और यह एक वैधानिक बाधा है। स्मरण हो कि जुलाई में नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा 9;6 और 9;7 के स्पष्ट प्रावधानों के खिलाफ है, जो किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों या मतदाता सूचियों में पंजीकृत होने से रोकता है। उल्लेखनीय है कि इसी साल जुलाई महीने में उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे। जो कई वजहों से सुर्खियों में रहे थे । खासकर दो जगह वोटर लिस्ट वाले प्रत्याशियों के चुनाव लड़ने, प्रत्याशियों के नामांकन रद्द करने, आरक्षण प्रस्ताव को लेकर निर्वाचन पर हाईकोर्ट की रोक, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया में वबाल से लेकर फायर आदि की वजह से। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उत्तराखंड में यह चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि क्या अब उन प्रत्याशियों , जिनके दो स्थानों पर की मतदाता सूची में नाम दर्ज थे, का निर्वाचन रद्द कर दिया जाएगा।
