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उत्तराखंडी व्यंजनों को भोजनालयों में स्टार्टअप के तौर पर स्वीकृति दी जाय: हरदा

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांगेस नेता हरीश रावत ने प्रदेश की धामी सरकार से उत्तराखंडी व्यंजन को एक स्टार्टअप के तौर पर स्वीकृति देकर प्रोत्साहित करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड इस समय पूरी तरीके से इन्वेस्टमेंट मय हैं। मैं उनका ध्यान एक उत्तराखंडी फूड सेक्टर की तरफ भी आकृष्ट कर रहा हूं। देहरादून में इन्दिरा अम्मा भोजनालय तो हमने सरकारी कॉन्सेप्ट के रूप में इंट्रोडड्ढूस किया थाए उसका गला तो खुद सरकार ने घौंट दिया लेकिन बहुत सारे लोग पर्वतीय उत्तराखंडी व्यंजनों के साथ बड़े जोश के साथ मैदान में आए हैं। लोगों ने नाम भी बहुत प्यारे प्यारे रखे किसी ने गढ़ भोज, किसी ने कुकसाल की रसोई, किसी ने बूढ़ दादी, किसी ने प्यारी पहाड़न आदि आदि नाम रखे हैं। बड़े जोश खरोश के साथ अपनी कार्यशील पूंजी जुटाई इनमें से कई लोग अपेक्षित सफलता नहीं पा रहे हैं आखिर क्यों लेकिन तीन कारणों से व्यावसायिक स्थल महंगा अथाह किराया महंगा जिस व्यंजन को परोस रहे हैं उस व्यंजन को तैयार करने वाला अन्न महंगा और जिन लोगों को लक्ष्य कर उन्होंने अपने यह प्रयास प्रारम्भ किये उन लोगों का अपेक्षित सहयोग न मिलना। माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरा आग्रह है कि यदि चाहते हैं । इस सेक्टर में कुछ होए एक तो पहला काम जो सरकार को करना चाहिए इनको सब्सिडाइज्ड रेट पर पहाड़ी मोटे अनाज और दालें उपलब्ध करवायें। दूसरा सरकारी स्टॉल्स चाहे बाजार में हों या किसी एग्जिबिशन इत्यादि में हों इनको उसी तर्ज पर अलॉट किया जाएं जिस तर्ज पर हमारी महिला स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। तीसरे उत्तराखंडी व्यंजन को एक स्टार्टअप के तौर पर स्वीकृति दी जाय और इसके लिए एक नए मानक पूंजी से लेकर के दूसरे सब चीजों के तैयार किए जाएं जो व्यावहारिक हो ताकि जिन मानकों के साथ साधारण नौजवान भी अपना स्टार्टअप खोल सकें और हो सकें तो ऐसे स्टार्टअप्स के लिए अनुदान की राशि भी बढ़ाई जाएं। उम्मीद है मेरी बात माननीय मुख्यमंत्री जी तक पहुंचेगी।

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