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जोशीमठ । वैदिक मंत्रोचारण और रीति रिवाजों के बीच आज विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट  शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस बार बदरीनाथ धाम में रिकार्ड 17.47 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। मंदिर को फूलों से सजाया गया है। कपाटबंदी के बाद अब शीतकालीन गद्दीस्थल पांडुकेश्वर व जोशीमठ में श्रद्धालु भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर सकेंगे । श्री बदरीनाथ.केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा- हरीश गौड़ ने बताया कि आज माणा गांव के महिला मंडल द्वारा बुने गए ऊन के घृत कंबल को भगवान बदरी विशाल को ओढ़ाकर शाम तीन बजकर 35 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। मीडिया प्रभारी ने बताया कि 20 नवंबर प्रात श्री उद्धव जी व श्री कुबेर जी की डोली श्री बदरीनाथ धाम से श्री योग ध्यान बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी। साथ में रावल व आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी भी योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी। श्री उद्धव जी एवं श्री कुबेर जी शीतकाल में श्री योग बदरी पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे एजबकि 20 नवंबर को पांडुकेश्वर प्रवास के पश्चात 21 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी। इसके पश्चात योग बदरी पांडुकेश्वर तथा श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में शीतकालीन पूजाएं आयोजित होगी।

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