September 20, 2026

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बदरीनाथ धाम पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, संतों का लिया आशीर्वाद,कथा महोत्सव और देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में किया प्रतिभाग

चमोली (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को श्रीबदरीनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि और शांति की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्रीबदरीनाथ कथा महोत्सव में प्रतिभाग कर संतों का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर संतों ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने बाद में बदरीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में भी प्रतिभाग किया। यहां उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खाद्य सामग्री की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कथा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बदरीनाथ धाम आना अपने आप में विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभव है। भगवान बदरीनाथ की कृपा के बिना यहां पहुंचना संभव नहीं है। जो भी श्रद्धालु यहां पहुंचता है, उस पर भगवान बदरी विशाल की विशेष कृपा होती है। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ धाम भारत की आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र है, जहां सनातन संस्कृति की चेतना निरंतर प्रवाहित होती है। यहां आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। शास्त्रें में भी कहा गया है कि बदरीनाथ के समान न कोई तीर्थ है और न भविष्य में होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का सानिध्य और उनका आशीर्वाद प्राप्त होना अपने आप में सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि आज दिव्य संतों का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिला है। यह अवसर इसलिए भी विशेष है क्योंकि गुरुदेव धर्म जीवन दास महाराज की 125वीं जयंती का पावन अवसर है। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन दास महाराज ने अपने संपूर्ण जीवन में त्याग, तपस्या और मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन केवल मंदिरों के निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मानव कल्याण के लिए भी अनेक कार्यों को आगे बढ़ाया। उनके जीवन से समाज को सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि हमारी भावी पीढ़ी आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से भी मजबूती से जुड़ी रहे। हमारे पूर्वजों ने जो व्यवस्थाएं निर्धारित की थीं, वे विज्ञान और जीवन के अनुभवों पर आधारित थीं। उन्होंने कहा कि आज भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो आधुनिक तकनीक को अपनाने के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं की जड़ों से भी जुड़े रहें। आधुनिक ज्ञान और अपनी सांस्कृतिक विरासत का समन्वय ही देश को मजबूत आधार दे सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में प्राचीन विरासत और सनातन संस्कृति को सम्मान मिल रहा है तथा आस्था के केंद्रों का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में 500 वर्षों की तपस्या के बाद भगवान श्रीराम का भव्य और दिव्य मंदिर स्थापित हुआ है। मोक्ष की नगरी काशी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण से लाखों श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और उसे भव्य स्वरूप देने का कार्य भी निरंतर आगे बढ़ा है। देश के अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में भी तीर्थाटन को लगातार विकसित किया जा रहा है और नई यात्रओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माणा गांव को पहले देश का अंतिम गांव कहा जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां आकर इसे भारत का पहला गांव बताया। इससे सीमावर्ती क्षेत्रें के विकास और वहां रहने वाले लोगों के महत्व को भी नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में शीतकालीन यात्र शुरू की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को वर्षभर धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है। आदि कैलाश में जहां पहले बहुत कम लोग पहुंच पाते थे, वहां अब एक वर्ष में करीब 65 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड में तीर्थाटन और पर्यटन को लगातार विकसित कर रही है। साथ ही प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं और प्रदेश की संस्कृति तथा जनसांख्यिकीय स्वरूप की सुरक्षा के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ धाम के अराइवल प्लाजा में आयोजित दो दिवसीय देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में भी प्रतिभाग किया। भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने किया था। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आयोजित महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं की विविध छटा देखने को मिली। महोत्सव में गढ़वाली लोकनृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रें और धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन मोह लिया। पांडव नृत्य और छंतोली नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ पारंपरिक खाद्य सामग्री, जैविक उत्पाद और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इससे महोत्सव में उत्तराखंड की लोक परंपराओं के साथ स्थानीय उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की झलक भी देखने को मिली।इस अवसर पर पूज्य मंगलस्वरूप दास, महंत स्वामी नारायण, स्वामी धर्मबल्लभ दास, राकेश भाई, अजय पाल, जयपाल सिंह बर्थवाल, रघुवीर सिंह, भास्कर, हरक सिंह, माधव सेमवाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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