काशीपुर में मुख्यमंत्री धामी ने छात्र छात्रओं से किया सीधा संवाद, पलायन, रोजगार, शिक्षा, पर्यावरण और तकनीकी नवाचार पर मांगे सुझाव
काशीपुर (उद संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कुंडेश्वरी रोड स्थित रिसॉर्ट में आयोजित युवा विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के भावी कर्णधारों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनके सपनों का उत्तराखंड कैसा हो, इस पर सुझाव मांगे और कहा कि युवाओं की सोच और उनके व्यावहारिक सुझाव प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में काशीपुर क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों छात्र छात्रएं मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने पलायन, स्थानीय रोजगार, डिजिटल शिक्षा, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर अपने विचार मुख्यमंत्री के सामने रखे। मुख्यमंत्री का विशेष हेलीकॉप्टर निर्धारित समय पर आईजीएल के अस्थायी हेलीपैड पर उतरा। यहां भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का फूल मालाओं से स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री का काफिला कुंडेश्वरी रोड स्थित कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुआ। कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उनसे सीधे बातचीत की और उनके सवाल तथा सुझाव सुने। युवा विद्यार्थी संवाद का उद्देश्य राज्य के विकास, शिक्षा और भविष्य की नीतियों को लेकर नई पीढ़ी की सोच और व्यावहारिक सुझावों पर मंथन करना था। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और यहां की विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने विचार रखे। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, पलायन रोकने, शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल, आपदा के समय बेहतर प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में युवाओं को जेन जी कहने के बजाय इन जी यानी इंडियन जनरेशन कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल नई पीढ़ी नहीं, बल्कि देश की अपनी पीढ़ी है, जिसकी सोच स्थानीय सीमाओं से आगे निकलकर वैश्विक स्तर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आज के युवा केवल अपने रोजगार और करियर के बारे में नहीं सोच रहे, बल्कि प्रदेश और देश के विकास से जुड़े विषयों पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के विचारों को सुनने और समझने से यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी उत्तराखंड के भविष्य को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि युवाओं के सुझावों में स्थानीय समस्याओं के समाधान के साथ आधुनिक तकनीक और नवाचार की सोच भी दिखाई दे रही है। यही सोच आने वाले समय में उत्तराखंड को नई दिशा दे सकती है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने सपनों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज और प्रदेश के हित में भी करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प देश के सामने रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की युवा शक्ति अपनी प्रतिभा, ऊर्जा, तकनीकी ज्ञान और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय का उत्तराखंड युवाओं के सपनों और उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप आकार लेगा। सरकार का प्रयास है कि युवाओं की बात केवल संवाद कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि उनके उपयोगी सुझावों को विकास की योजनाओं और नीतियों से जोड़ने का प्रयास किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास की समस्याओं को समझें, उनके समाधान के लिए नए विचार दें और उत्तराखंड के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने युवाओं से रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तलाशने का आ“वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उन्हें सही अवसर, बेहतर शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और अपनी क्षमता के अनुरूप मंच मिले। स्थानीय संसाधनों, पर्यटन, कृषि, स्वरोजगार और तकनीकी क्षेत्र में संभावनाओं का उपयोग कर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर ऐसे अवसर तैयार करने होंगे, जिससे युवा अपने गांव और क्षेत्र में रहकर आगे बढ़ सकें। युवाओं के सुझाव इस दिशा में सरकार को नई सोच और नए रास्ते दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों ने विद्यार्थियों के सामने सीखने के अवसरों का विस्तार किया है। दूरस्थ क्षेत्रें के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल और नवाचार बढ़ाने के लिए करने का आ“वान किया। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए विद्यार्थियों ने आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने इन विषयों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास की योजनाएं यहां की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आ“वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं की जागरूकता और तकनीकी सोच इस दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकती है। मुख्यमंत्री के साथ हुए संवाद में विद्यार्थियों ने खुलकर अपने सवाल और सुझाव रखे। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनी और कई विषयों पर संवाद करते हुए युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के बाद छात्र छात्रओं के चेहरों पर उत्साह और संतोष के भाव दिखाई दिए।
