August 30, 2026

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पेपर लीक में तीन लोगों की भूमिका आई सामने : दोनों महिलाओं से पूछताछ कर रही पुलिस, खालिद की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में जांच कर रही पुलिस ने अब तक तीन लोगों की संलिप्तता की पुष्टि की है। इनमें एक अभ्यर्थी खालिद मलिक, उसकी बहन हीना और एक सहायक प्रोफेसर सुमन शामिल हैं। रायपुर थाना क्षेत्र में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2023 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दोनों महिलाओं से पूछताछ जारी है और खालिद की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। एसएसपी अजय सिंह ने देर रात पत्रकार वार्ता में बताया कि पेपर लीक का यह मामला सीमित दायरे तक ही रहा और किसी बड़े गैंग के शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इससे पूरी परीक्षा की शुचिता पर कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि लीक हुआ प्रश्न पत्र केवल एक सेट था, जो हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से एक ही अभ्यर्थी के लिए बाहर आया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह सुनियोजित लेकिन सीमित स्तर पर रची गई साजिश थी, जिसका लाभ केवल एक अभ्यर्थी को दिलाने के लिए प्रयास किया गया। पुलिस जांच के अनुसार, खालिद मलिक परीक्षा में बैठा हुआ था और उसी के लिए प्रश्न पत्र केंद्र से बाहर भेजा गया। पेपर के स्क्रीनशॉट उसकी बहन हीना तक पहुंचे, जिसने उसे सहायक प्रोफेसर सुमन को भेजा और उनसे उत्तर मांगे। सुमन ने उत्तर तो भेज दिए, लेकिन बाद में उन्हें शक हुआ और वह पुलिस से संपर्क करने को तत्पर हुईं। हालांकि, इससे पहले उन्होंने बॉबी पंवार से संपर्क किया, जिन्होंने कथित रूप से उन्हें पुलिस के पास जाने से रोका और मामले को एक प्रचार का मुद्दा बना दिया। एसएसपी के अनुसार, इस प्रकरण की तीन मुख्य कड़ियाँ अब तक सामने आ चुकी हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि प्रोफेसर सुमन साजिश में जानबूझकर शामिल थीं या फिर उन्हें बहला-फुसलाकर इसका हिस्सा बनाया गया। खालिद की गिरफ्तारी के बाद ही इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस की विशेष जांच टीम संदिग्धों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि खालिद को शीघ्र गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सकेगा। यदि जांच में लीक का दायरा सीमित ही पाया जाता है, तो परीक्षा दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन इसके विस्तार के संकेत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

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