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“राइस पुलर” रहस्यमयी धातु के नाम पर रुद्रपुर के व्यापारी से लाखों रूपये ठगे

रुद्रपुर। कथित राइस पुलर (आरपी) नामक रहस्यमयी धातु के नाम पर देशभर में सक्रिय ठगों का संगठित सिंडिकेट लोगों को करोड़ों रुपये का लालच देकर उनकी गाढ़ी कमाई हड़प रहा है। अंतरिक्ष से गिरी दुर्लभ धातु, वैज्ञानिक जांच और विदेशी खरीदारों के नाम पर यह गिरोह व्यापारियों और आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहा है। ताजा मामला रुद्रपुर का है, जहां शहर के पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कारोबारी बलवंत राय अरोड़ा से 22.50 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। पीड़ित ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। डांबर कॉलोनी निवासी बलवंत राय अरोड़ा के अनुसार दिसंबर 2024 में सिक्किम के एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर दावा किया कि उसके पास राइस पुलर धातु है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये है। बाद में उसे दिल्ली और लखनऊ के कुछ लोगों से मिलवाया गया, जिन्होंने स्वयं को एक निजी कंपनी से जुड़ा बताया। फरवरी 2025 में लखनऊ के एक सुनसान क्षेत्र में कांच के बॉक्स में रखी कथित धातु दिखाई गई। आरोपियों ने कहा कि रूस के वैज्ञानिक इसकी जांच करेंगे, जिस पर 22.50 लाख रुपये खर्च होंगे। भरोसा दिलाने के बाद पीड़ित ने एक महिला के खाते में 12.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए और 10 लाख रुपये नकद दिल्ली स्थित कार्यालय में सौंप दिए। रकम लेने के बाद आरोपी लगातार बहाने बनाते रहे। जब पीड़ित ने धनराशि वापस मांगी तो 20 अप्रैल 2026 को दिल्ली पहुंचने पर आरोपियों ने कथित रूप से गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। एसएसपी अजय गणपति ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राइस पुलर के नाम पर ठगी का यह खेल लंबे समय से देश के कई राज्यों में चल रहा है। ठग पहले किसी धातु को करोड़ों में बिकने वाली दुर्लभ वस्तु बताते हैं, फिर वैज्ञानिक परीक्षण, सरकारी मंजूरी और विदेशी खरीदारों का हवाला देकर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
क्या होती है राइस पुलर ;आरपीद्ध, जानिए इसके बारे में
राइस पुलर आरपी एक कथित रहस्यमयी धातु या उपकरण को कहा जाता है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि उसमें ऐसे विशेष चुंबकीय या रेडियोधर्मी गुण होते हैं जो चावल के दानों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं। इसी कारण इसे फ्राइस पुलरय् नाम दिया गया। ठग लोगों को बताते हैं कि यह धातु अंतरिक्ष से गिरे किसी उपग्रह या प्राचीन उपकरण का हिस्सा है और इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये है। दावा किया जाता है कि विदेशी वैज्ञानिक और बड़ी कंपनियां इसकी जांच कर भारी रकम देकर इसे खरीदने को तैयार हैं। वैज्ञानिक परीक्षण, सुरक्षा शुल्क, सरकारी मंजूरी और कमीशन के नाम पर लोगों से लाखों रुपये जमा कराए जाते हैं। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से अब तक ऐसी किसी धातु के अस्तित्व की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकांश मामलों में यह केवल भ्रम और धोखाधड़ी का जरिया साबित हुआ है। कई बार स्थैतिक विद्युत, चुंबक या चिपचिपे पदार्थ की मदद से चावल के दाने चिपकाकर लोगों को विश्वास दिलाया जाता है कि धातु में कोई चमत्कारी शक्ति है। पुलिस और वैज्ञानिक संस्थानों ने समय-समय पर स्पष्ट किया है कि राइस पुलर के नाम पर किए जाने वाले अधिकांश दावे निराधार हैं और यह लोगों को करोड़ों रुपये का लालच देकर ठगने का सुनियोजित तरीका है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति ऐसी धातु दिखाकर निवेश या जांच के नाम पर धनराशि मांगे तो तुरंत सतर्क हो जाएं और इसकी सूचना पुलिस को दें।

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