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बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में टकराव तेज, हेमंत द्विवेदी ने डिबेट से किया इनकार, गणेश गोदियाल ने उठाए कई सवाल

गणेश गोदियाल ने चढ़ावा चोरी के आरोपी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति को लेकर अपना पक्ष रखा
देहरादून: बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर सियासी घमासान थमता नजर नहीं आ रहा है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा दी गई खुली बहस की चुनौती को वर्तमान बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। देहरादून प्रेस क्लब में मीडिया से बातचीत करते हुए गणेश गोदियाल ने बदरीनाथ धाम में  चढ़ावा चोरी के आरोपी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति को लेकर अपना पक्ष रखा और कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि उनके नौ वर्ष के कार्यकाल के दौरान सरकार ने कभी कोई आरोप नहीं लगाया और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की। उनका आरोप है कि अब बदरीनाथ मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।गोदियाल ने कहा कि सरकार को आरोप लगाने के बजाय मंदिर की व्यवस्थाओं को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपी के मामले में मंदिर समिति द्वारा प्रकरण को दबाने का प्रयास किया गया। कुमाऊँ दौरे के दौरान उन्हें बद्रीनाथ में हुए इस मामले की जानकारी मिली। उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री इस प्रकरण में हस्तक्षेप करेंगे और समिति से जुड़े लोगों की निष्पक्ष जांच कराएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।इसके अतिरिक्त, बीकेटीसी अध्यक्ष द्वारा अपने निजी सहायक को अवैध रूप से गणना के कार्य में लगाया गया, जो एक गंभीर मामला है। वहीं, मेरे कार्यकाल को लेकर आरोप लगाए गए कि उनकी नियुक्ति गोदियाल के कार्यकाल में हुई थी।मंदिर निर्माण को लेकर लगाए जा रहे आरोप भी उचित नहीं हैं। मंदिर निर्माण एक पुण्य कार्य है, इसमें कोई गलत या अवैध कार्य नहीं किया गया। सभी कार्य बोर्ड की सहमति और स्वीकृति से संपन्न हुए हैं।उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि किसी बोर्ड को समाप्त कर देने भर से व्यवस्थाएं नहीं बदल जातीं। उन्होंने भाजपा सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।उन्होंने आरोप लगाया कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है और चढ़ावा चोरी के मामले को दबाने की कोशिश की गई। गोदियाल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने बीकेटीसी अध्यक्ष के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।गणेश गोदियाल ने कहा कि उन्होंने हेमंत द्विवेदी को प्रेस क्लब में आमने-सामने बहस के लिए आमंत्रित किया था और उनके लिए कुर्सी भी लगाई गई थी, लेकिन वह नहीं पहुंचे। उनके अनुसार, बहस से दूरी बनाने के कारण बीकेटीसी अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।गौरतलब है कि इससे पहले बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गणेश गोदियाल पर उनके लंबे कार्यकाल के दौरान कई अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के जवाब में गोदियाल ने सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बहस की चुनौती दी थी और कहा था कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस तथ्य हैं तो उन्हें जनता के सामने रखा जाए। हालांकि, हेमंत द्विवेदी ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है।

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