August 30, 2026

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प्रश्नकाल में उठे कई सवाल,सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने जंगली जानवरों के आतंक और जटिल वन कानूनों के कारण ठप पड़े विकास कार्यों पर सरकार को जमकर घेरा

भराड़ीसैंण (उद संवाददाता)। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। सत्र के दौरान सीएम धामी ने दिवंगत उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि दी। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राज्य की कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया, वहीं प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने जंगली जानवरों के आतंक और जटिल वन कानूनों के कारण ठप पड़े विकास कार्यों पर सरकार को जमकर घेरा। सदन के भीतर मंत्रियों के जवाबों से असंतुष्ट विधानसभा अध्यक्ष ऋ तु खंडूरी ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए मंत्रियों को भविष्य में पूरी तैयारी के साथ सदन में आने की हिदायत दी।सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विधानसभा के बाहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। सदन के भीतर प्रश्नकाल के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा सबसे प्रमुखता से छाया रहा। डोईवाला विधायक बृज भूषण गैरोला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन के पटल पर आंकड़े रखते हुए बताया कि राज्य गठन से लेकर 31 जनवरी 2026 तक जंगली जानवरों के हमलों में 1,296 लोगों की मौत हुई है, जबकि 6,624 लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को अब बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। हालांकि, जंगली जानवरों द्वारा फसलों की बर्बादी पर सत्ता पक्ष के विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुन्ना सिंह चौहान ने वन (संरक्षण) अधिनियम के कारण ग्रामीणों के हक-हकूक और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं पर सरकार से तीखे सवाल पूछे, जिनका स्पष्ट जवाब न दे पाने पर मंत्री सुबोध उनियाल को स्पीकर की नाराजगी झेलनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष ने तल्ख लहजे में कहा कि मंत्रियों को प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर गंभीरता से और पूरी जानकारी के साथ जवाब देना चाहिए। वन कानूनों की जटिलता पर भाजपा विधायक खजान दास ने सवाल उठाया कि क्या देश में अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग कानून हैं? उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए पूछा कि उत्तराखंड में सड़कों और पेयजल परियोजनाओं के मामले सालों तक वन विभाग के पास क्यों अटके रहते हैं। जवाब में वन मंत्री ने दावा किया कि पिछले एक साल में 6 विभागों के 713 प्रकरणों को वन स्वीकृति प्रदान की गई है और अब प्रक्रियाओं में तेजी आई है। वहीं, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल द्वारा यमुनोत्री-खरसाली रोपवे के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर संसदीय कार्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि एक नई कंपनी को टेंडर आवंटित कर दिया गया है और जल्द ही कार्य पूरा होगा। इसी क्रम में लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने जोशीमठ के सुदूरवर्ती गांव जुगवाड़ा में पैदल झूला पुल के निर्माण का भरोसा दिलाया। पूरे दिन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता प्रीतम सिंह ने सरकार पर मंत्रियों की अधूरी तैयारी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जनहित के गंभीर सवालों से बचने का प्रयास कर रही है। प्रदेश में वनाग्नि को रोकने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिन गंभीर प्रयासों को शुरू किया गया है, उनसे सार्थक परिणामों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। सरकार ने वन विभाग के माध्यम से एक वर्ष के भीतर ग्रामीणों से पांच करोड़ 42 लाख रूपये का पिरूल खरीदा है। चीड़ के जंगलों में आग लगने के मूल कारण को खत्म करने के लिए ग्रामीणों से वर्ष 2025 में 5532 टन पिरूल खरीदा गया है। इस लक्ष्य को अब बढ़ाकर 8555 टन कर दिया गया है। सरकार की ये ही मंशा है कि पिरुल एकत्रित कर आग की आशंका को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया जाए। वनाग्नि को रोकने के लिए धामी सरकार के प्रयासों में जनजागरूकता पर भी फोकस किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर 1239 जागरूकता कैंप लगाए गए हैं। सबसे अहम काम सरकार ने यह किया है कि ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फाॅरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी गठित की है, जो विभाग के साथ मिलकर जंगल बचाने में जुट रही हैं। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत को 30 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। मंगलवार को बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने यह जानकारी साझा कीं। प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है। प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।

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