ईडी छापे पर भावुक हुए हरीश रावत : “जहां छापा मारना है मारो” “जो पैसा मिला, उसे मेरा पैसा बताकर बदनाम किया जा रहा”
कभी “स्टिंग”, कभी “स्टीकर” और कभी “सर्वर” के जरिए उन पर प्रहार किया जाता है
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने अपने पूर्व ओएसडी चंदन जीना के घर ईडी की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी है। रावत ने केंद्रीय जांच एजेंसियों ईडी और सीबीआई को अपने पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच करने की खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि उनके तथाकथित “छिपे खजाने” को तलाशना है तो जहां छापा मारना है, वहां छापा मारा जाए। रावत ने कहा कि वह करीब दस साल से सत्ता से बाहर हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ तरह-तरह के आरोप और अभियान चलते रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कभी “स्टिंग”, कभी “स्टीकर” और कभी “सर्वर” के जरिए उन पर प्रहार किया जाता है। उनके मुताबिक लोकतंत्र में आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ लोग स्वस्थ तरीके से और कुछ लोग दुष्प्रचार के जरिए हमला करते हैं।
चंदन जीना को बताया सरकार का “छोटा पुर्जा”
चंदन जीना के घर ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि जीना उनकी सरकार में कोई बड़ा अधिकारी या निर्णायक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि सरकार के एक छोटे से पुर्जे की तरह थे। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने भर्ती संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई थी।रावत के अनुसार, पब्लिक सर्विस कमीशन, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और भर्ती बोर्डों से संपर्क मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव स्तर पर ही किया जाना तय था। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में संबंधित संस्थाओं को सरकार की ओर से किसी सुझाव या समस्या के लिए प्रमुख सचिव, कार्मिक विभाग के माध्यम से संपर्क करने को कहा जाता था।उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने इन संस्थाओं की स्वायत्तता का हमेशा सम्मान किया।
“मेरे तीन साल के कार्यकाल की जांच के लिए आयोग बना दो”
हरीश रावत ने कहा कि वह जांच से भागने वाले नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि उनके तीन साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल की पूरी जांच के लिए आयोग गठित किया जाए।उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल की फाइलों को पहले भी जांचा जा चुका है और यदि जरूरत है तो एक बार फिर सभी फैसलों की पड़ताल की जाए। रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए स्टिंग और राष्ट्रपति शासन की परिस्थितियों की भी गहराई से जांच कराने की मांग की।उन्होंने राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के उन नेताओं की भी जांच की मांग की, जिनकी भूमिका उस दौर की राजनीतिक घटनाओं में रही थी।
चंदन जीना के साथ 1991 से संबंध का दावा
रावत ने चंदन जीना के साथ अपने पुराने संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह 1991 से उनके साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने जीना को बेहद निष्ठावान, विनम्र और सहनशील कर्मचारी बताते हुए कहा कि लंबे समय तक उन्होंने उनके साथ पूरी निष्ठा से काम किया।रावत ने कहा कि चंदन जीना को हमेशा वेतन दिया गया और उनके मुताबिक वह “24 घंटे के कर्मचारी” की तरह उनके साथ रहे। उन्होंने कहा कि जीना का हर व्यक्ति को सम्मान देने का स्वभाव उनके राजनीतिक जीवन में उनके लिए मददगार रहा। रावत ने उन चर्चाओं पर भी नाराजगी जताई जिनमें चंदन जीना के यहां कथित तौर पर मिले पैसों को उनका पैसा बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान उन्हें अपने इलाज और घर के खर्च के लिए मित्रों तथा शुभचिंतकों से आर्थिक मदद मिली थी।रावत ने दावा किया कि मेदांता में इलाज के दौरान विभिन्न राज्यों से लोग उनकी मदद के लिए आए और आर्थिक सहयोग किया। उन्होंने यह भी कहा कि अस्थायी आवास पहुंचने के समय उनके पास 12 लाख रुपये थे, जिन्हें खातों आदि में समायोजित करने में समय लगा।उन्होंने कहा कि उनके लंबे राजनीतिक जीवन में लोगों ने उनका सहयोग किया है और उन्होंने किसी को राजनीतिक पद या काम दिलाने के बदले “सर्विस चार्ज” के रूप में पैसा नहीं लिया।
“हमने लोग कमाए, पैसा नहीं”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन “खुली किताब” है। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीति में पैसा कमाने के बजाय लोगों का विश्वास और संबंध कमाए हैं।रावत ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल में पांच लाख रुपये से अधिक आयकर जमा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे सार्वजनिक जीवन और बड़े-बड़े पदों पर रहने के बाद क्या उनके पास एक-दो करोड़ रुपये की संपत्ति होना असंभव है?साथ ही उन्होंने चंदन जीना की कमाई को अपने नाम से जोड़कर प्रचारित किए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि लंबे समय तक निष्ठा से काम करने वाले व्यक्ति की कमाई का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।
भर्ती को लेकर भी रखा अपना पक्ष
हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई सरकारी भर्तियों का आंकड़ा रखते हुए दावा किया कि उनके तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरी मिली, जबकि करीब 18 हजार पदों की भर्ती का अधियाचन जारी किया गया था।उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के साथ-साथ शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और मेडिकल भर्ती बोर्डों के गठन की दिशा में काम किया। उनके मुताबिक तीन साल में दो बार लोक सेवा आयोग की भर्तियां कराई गईं और तीसरी भर्ती की तैयारियां भी शुरू कर दी गई थीं।हालांकि, रावत ने अपने कार्यकाल की एक चूक भी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति में उनसे गलती हुई और संबंधित व्यक्ति उस पद की गरिमा बनाए नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि उनकी ही सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी और परीक्षा परिणाम से संबंधित प्रक्रिया को रोकने तथा परीक्षा निरस्त करने के लिए जांच समिति भी बनाई गई थी। रावत ने इस नियुक्ति को लेकर पहले भी माफी मांगने और दोबारा माफी मांगने की बात कही।
“मेरी रक्षा कौन करेगा—जनता या उत्तराखंड के देवी-देवता?”
अपने संदेश के अंत में रावत भावुक नजर आए। उन्होंने उत्तराखंड की जनता से कहा कि सांसद बनने के समय से लेकर आज तक उन्होंने लगातार प्रदेश के लोगों के मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके करीब 60 वर्ष के सामाजिक जीवन पर जिस तरह आरोप लगाने और धब्बा लगाने की कोशिश हो रही है, उसमें उत्तराखंड की जनता को उनकी रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। रावत ने कहा कि यदि लोग उनके साथ नहीं आएंगे तो उन्हें भरोसा है कि “उत्तराखंड के देवी-देवता” उनकी रक्षा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनके खिलाफ चल रहा कथित अभियान जारी रहा तो वह वीडियो के माध्यम से और जरूरत पड़ने पर जगह-जगह वैन लगाकर भी अपनी बात जनता तक पहुंचाएंगे।
