चम्पावत में हुई धामी कैबिनेट की बैठक में कई बड़े फ़ैसले : पट्टे वाली जमीनों के नियमितीकरण का रास्ता साफ
खटीमा, टनकपुर और बनबसा में सरकारी भूमि पर बसे लोगों को पक्के मकान देने की तैयारी
बनबसा (उद संवाददाता)। राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार भारत नेपाल सीमा से सटे बनबसा में हुई धामी कैबिनेट की बैठक में 25 प्रस्तावों पर मुहर लगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीमांत क्षेत्रें के विकास, युवाओं की स्किलिंग, कुक्कुट पालन, स्वास्थ्य और विभागीय समन्वय से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने फैसलों की जानकारी दी। कैबिनेट ने पट्टे वाली जमीनों के नियमितीकरण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। खटीमा, बनबसा और आसपास के क्षेत्रें में पट्टे वाली जमीनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा टनकपुर और बनबसा में सरकारी जमीन पर बसे लोगों के लिए भी सरकार ने फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों को पक्के मकान बनाकर देने की बात कही है। सरकार शारदा कॉरिडोर का दायरा बढ़ाने की भी तैयारी कर रही है। इसके तहत क्षेत्र के कई अन्य मंदिरों को कॉरिडोर में शामिल किया जाएगा। इससे धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। कैबिनेट ने स्नातकोत्तर चिकित्सकों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी है। वर्तमान में करीब 75 हजार रुपये मिलने वाला स्टाइपेंड बढ़ाकर करीब एक लाख रुपये किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े इस फैसले से सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पीजी कर रहे चिकित्सकों को लाभ मिलेगा। युवाओं के लिए कौशल विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। सरकार के अनुसार कुछ विषयों के विद्यार्थियों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के लिए जरूरी व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्किल आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। प्रत्येक सेमेस्टर में छह क्रेडिट के इन पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित नई तकनीकों और रोजगार से जुड़ी अन्य आवश्यक दक्षताओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिग्री के साथ उद्योग और बदलते रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। पहाड़ी क्षेत्रें के कुक्कुट पालकों के लिए फीड पर सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया गया है। यह सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में पहुंचाई जाएगी। सरकार के मुताबिक इससे करीब दो हजार कुक्कुट पालकों को लाभ मिलेगा और इसके लिए लगभग दो करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। कैबिनेट ने पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए डायरेक्टर जनरल के पद को अपग्रेड करने को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य तीनों क्षेत्रें से जुड़े कार्यों में प्रशासनिक तालमेल बेहतर करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रें तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध् उनियाल, सौरभ बहुगुणा, धन सिंह रावत, चम्पावत जिले के प्रभारी मंत्राी भरत चौधरी, गणेश जोशी, राम सिंह कैड़ा, रेखा आर्या, खजान दास, मदन कौशिक सहित मुख्य सचिव आनंद वर्धन, शैलेश बगौली, आर के सुधांशु, डॉ. वी. षनमुगम, पहुंचे हैं। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, आईजी निवेदिता कुकरेती सहित चम्पावत के डीएम मनीष कुमार, एसपी रेखा यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब जिलों में भी होंगी कैबिनेट बैठकें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें अब केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी आयोजित की जाएंगी। बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक को उन्होंने इस दिशा में नई पहल बताया। उन्होंने कहा कि जिलों में बैठकें होने से स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार की प्राथमिकता सीमांत क्षेत्रें में रहने वाले लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रें में कैबिनेट बैठकें आयोजित होने से स्थानीय परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलेगी तथा क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के हर क्षेत्र का संतुलित विकास राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है। सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रें तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। जन जन तक सरकार की पहुंच और हर क्षेत्र का समान विकास सरकार की प्राथमिकता है।



