August 30, 2026

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गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद

उत्तरकाशी (उद संवाददाता)। अन्नकूट पर्व के पावन अवसर पर बुधवार को गंगोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रेच्चारण और विधिविधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। शुभ अभिजीत मुहूर्त में पूर्वाह्न 11 बजकर 36 मिनट पर कपाट बंद किए गए। इस दौरान धाम परिसर में सेना के बैंड, पारंपरिक वाद्य यंत्रें की मधुर स्वर लहरियों और ‘गंगा मैया की जय’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। कपाट बंद होने के साथ ही मां गंगा की उत्सव डोली हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अपने शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हुई। अब अगले छह माह तक मुखबा गांव में गंगा मां की पूजा-अर्चना होगी। बुधवार सुबह से ही धाम में तीर्थ पुरोहितों द्वारा विशेष पूजन-अनुष्ठान और गंगा जी का अभिषेक किया गया। घाट पर आरती की गई और श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। हर्षिल से पहुंचे भारतीय सेना के जवानों ने श्रद्धालुओं की सेवा हेतु निःशुल्क चिकित्सा शिविर और लंगर का आयोजन किया, जो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। गंगोत्री मंदिर से रवाना होने के बाद मां गंगा की डोली रात्रि विश्राम हेतु मार्कंडेयपुरी देवी मंदिर में ठहरी, जहाँ पूरी रात भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। अगले दिन डोली मुखबा गांव पहुँचेगी, जहाँ अब आगामी छह महीनों तक मां गंगा की पूजा यहीं की जाएगी। धाम के तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई के साथ गंगा मैया की डोली यात्र में भाग लिया। हालांकि कपाट बंद कर दिए गए हैं, लेकिन धाम में स्थित विशाल तांबे के दीपक में अखंड जोत अब भी निरंतर जलती रहेगी। मंदिर समिति अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। जब अगले वर्ष अक्षय तृतीया के शुभ दिन कपाट पुनः खुलेंगे, तो श्रद्धालुओं को इसी अखंड ज्योति के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त होगा।

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