सफेद हाथी साबित हो रहा है रुद्रपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल
सरकार के करोड़ों रुपए खर्च कर भी श्रमिकों को क्या मिला फायदा? शराब, साजिश, षडड्ढंत्र और भ्रष्टाचार को लेकर रहता है सुर्खियों में, बेलगाम है ठेकेदार
रुद्रपुर। कोई भी सरकार आम आदमी के हितों के लिए कोई भी योजना बनाती है तो उसके अपने कर्मचारी किस तरह सरकार की योजना पर पलीता लगाते हैं इसका जीता जागता उदाहरण है ईएसआईसी अस्पताल रुद्रपुर जो इस समय विवादों और गंभीर अनियमितताओं के घेरे में है। सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस अस्पताल का निर्माण किया था। लेकिन हाल ही में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ;दिशाद्ध की बैठक में सांसद अजय भट्टð और स्थानीय विधायक शिव अरोरा द्वारा अस्पताल की बदहाली और सुरक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी कितने बेलगाम हो चुके हैं इसका अंदाजा दिशा की इस बैठक से लगाया जा सकता है जिसमें सांसद और जिलाधिकारी मौजूद थे लेकिन अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी गायब।दिशा की बैठक के दौरान अस्पताल के भीतर अनुशासनहीनता का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया जिसमें अस्पताल के स्टाफ और संविदा कर्मचारियों द्वारा डड्ढूटी के दौरान या अस्पताल परिसर के भीतर शराब पीने और नशाखोरी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यहां कार्यरत अधिकतर कर्मचारी नशे की हालत में रहते हैं, जिसके कारण आपातकालीन वार्ड में आने वाले गंभीर मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सांसद अजय भट्ट के कड़े रुख के बाद, जिलाधिकारी के निर्देशन में मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। अगर इस अस्पताल की निष्पक्षता के साथ जांच हुई तो कई अधिकारी कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। जून 2026 में यह अस्पताल उस समय अखाड़ा बन गया जब यहाँ कार्यरत 23 संविदा नर्सों को बिना किसी पूर्व सूचना के सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया।प्रदर्शन कर रही नर्सों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और प्रबंधन द्वारा नौकरी बचाने के बदले 2 लाख तक की रिश्वत ;सुविधा शुल्कद्ध मांगी जा रही थी। पैसे न देने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया महिला कर्मचारियों ने नर्सिंग अधिकारी और ठेका कंपनी पर मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न करने और आवाज उठाने पर नौकरी से निकालने की धमकी देने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। नर्सों और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने अस्पताल के भीतर के सच को सामने लाने के लिए परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। रुद्रपुर सिडकुल क्षेत्र में 2 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक इस योजना से जुड़े हैं, लेकिन अस्पताल बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। जबकि हर साल इस अस्पताल के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत होता है। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ जानबूझकर गंभीर मरीजों को समय पर इलाज देने के बजाय रेफर कर देते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यह अस्पताल मात्र एक सफेद हाथी और रेफरल सेंटर बनकर रह गया है अस्पताल में महिला डॉक्टरों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और एक्स-रे जैसी बुनियादी मशीनों की भारी कमी है, जिससे गरीब मजदूरों को निजी अस्पतालों के महंगे चक्कर काटने पड़ते हैं। अस्पताल प्रबंधन की तानाशाही और लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले की सबसे महत्वपूर्ण दिशा बैठक से अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और उच्च अधिकारी गायब रहे। उन्होंने बैठक में केवल कनिष्ठ कर्मचारियों को भेजकर खानापूर्ति करने की कोशिश की, जिस पर सांसद अजय भट्टð ने कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।श्रमिकों और उनके आश्रितों को मुफ्रत और बेहतर चिकित्सा सेवा देने के उद्देश्य से बना यह करोड़ों का ईएसआईसी अस्पताल वर्तमान में भ्रष्टाचार, दुर्व्यवहार और नशाखोरी का केंद्र बन चुका है। प्रशासन द्वारा बैठाई गई मौजूदा जांच ही यह तय करेगी कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और यहाँ आने वाले गरीब मरीजों को कब तक सुचारू इलाज मिल पाएगा।
