उत्तराखंड भाजपा के आंतरिक सर्वे में सरकार से संतुष्ट, दो तिहाई विधायकों से नाराजगी
संगठन ने सुधार का दिया एक और मौका, स्थिति नहीं बदली तो कई टिकटों पर चल सकती है कैंची
देहरादून। उत्तराखंड भाजपा के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कराए जा रहे आंतरिक सर्वे में एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आने की चर्चा है। सूत्रें के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी फैसलों को लेकर स्थानीय स्तर पर सकारात्मक फीडबैक मिला है, लेकिन इसके विपरीत भाजपा के मौजूदा विधायकों में से दो तिहाई विधायकों के प्रति लगातार असंतोष दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी द्वारा अलग-अलग चरणों में कराए गए सभी आंतरिक सर्वे में लगभग यही स्थिति सामने आई है। एक के बाद एक सर्वे में समान फीडबैक मिलने के बाद संगठन ने इसे गंभीरता से लिया है। सूत्रें का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने संबंधित विधायकों को अपनी कार्यशैली में सुधार, जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बढ़ाने तथा संगठन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने का एक और अवसर दिया है। अगले कुछ महीनों में इन सभी विधानसभा क्षेत्रें की दोबारा समीक्षा की जाएगी। यदि इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर फीडबैक में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई देता है तो विधानसभा चुनाव में अधिकांश मौजूदा विधायकों के टिकट पर संकट खड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि संगठन ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से व्यापक फीडबैक जुटाया है। इस दौरान सरकार के कामकाज और योजनाओं के प्रभाव के साथ-साथ प्रत्येक विधायक की क्षेत्रीय सक्रियता, जनसंपर्क, संगठन से तालमेल, उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता का अलग-अलग मूल्यांकन किया गया। समीक्षा में कई सीटों पर सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल होने के बावजूद स्थानीय विधायक के खिलाफ असंतोष दर्ज होने की बात सामने आई है।सूत्रें का कहना है कि भाजपा नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे में पार्टी किसी भी सीट पर केवल वर्तमान विधायक होने के आधार पर टिकट देने के पक्ष में नहीं है। संगठन की प्राथमिकता ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की होगी जिनकी स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता बेहतर हो और जिनकी जीत की संभावना अधिक मानी जा रही हो। यही कारण है कि इस बार टिकट वितरण में आंतरिक सर्वे और संगठनात्मक फीडबैक को विशेष महत्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि आगामी समीक्षा में भी यही स्थिति बनी रहती है तो कई विधानसभा क्षेत्रें में नए चेहरों को मौका मिल सकता है। दूसरी ओर संभावित दावेदारों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है, जबकि मौजूदा विधायक क्षेत्र में जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रमों में पहले से अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से आंतरिक सर्वे या संभावित टिकट बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड द्वारा ही लिया जाएगा। लेकिन लगातार सामने आ रहे आंतरिक फीडबैक ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि इस बार टिकट वितरण में संगठन का मुख्य आधार स्थानीय स्तर की रिपोर्ट, क्षेत्रीय प्रदर्शन और जीत की संभावना होगी।
