भक्तों ने ‘पीएम मोदी’ की अपील को भी किया ‘नजरअंदाज’
आठ दिन में अपने साथ दस क्विंटल प्लास्टिक कचरा ले केदारनाथ पहुंचे श्रद्धालु,प्लास्टिक कचरा के निस्तारण के लिए युद्ध स्तर पर जुटी नगर पंचायत
केदारनाथ । बाबा केदार में दर्शन के लिए उमड़ रही तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ पर सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रेम कुछ इस कदर सर चढ़कर बोल रहा है कि भक्तों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को भी नजरअंदाज कर दिया है। गौर तलब है कि कुछ दिनों पूर्व ही दिल्ली- देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के लिए उत्तराखंड पहुंचे पीएम मोदी ने उत्तराखंड पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों से पांच अपील की थी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की अपील भी शामिल थी, पर ऐसा लग रहा है जैसे केदारनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं पर प्रधानमंत्री की अपील का कोई असर नहीं हुआ है और वे अपने साथ भारी मात्र में प्लास्टिक कचरा केदारनाथ ला कर उच्च हिमालय परिस्थितिकी तंत्र को संकट में डाल रहे हैं। संतोष की बात तो यह है कि नगर पंचायत केदारनाथ धाम को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने की दिशा में कोई भी कोर कसर बाकी नहीं रख रही है और उसे इस दिशा में काफी हद तक सफलता भी प्राप्त हुई है। बताना होगा कि नगर पंचायत ने यात्र के पहले एक सप्ताह में ही करीब एक हजार किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर कॉम्पेक्ट कर लिया है और अब नगर पंचायत गीले कचरे का निपटारा करने के लिए भी पक्के पिट बनाने की तैयारी में भी है। याद दिलाना होगा कि अभी तकरीबन सप्ताह भर पहले 22 अप्रैल को ही केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए थे। यात्र के पहले ही दिन से धाम में तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ रही है, जिसके चलते केदार धाम में भारी प्लास्टिक कचरा पहुंच रहा है, जिसमें पानी की बोतलें मुख्य हैं। खास बात तो यह है कि नगर पंचायत केदारनाथ को इस स्थिति का पूर्वाभास था और वह इससे निपटने के लिए पहले से ही तैयार थी। इस क्रम में नगर पंचायत की ओर से धाम में तीन हजार वर्ग फिट क्षेत्र में मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी स्थापित की गई है। जहां धाम में एकत्रित होने वाले प्लास्टिक व ठोस कचरे को जमा कर 15 अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से प्लास्टिक, कांच, टिन, कपड़े का कचरा आदि शामिल है। इसके साथ ही धाम में ही नगर पंचायत ने कॉम्पेक्टर मशीन भी लगाई गई है, जो बोतलों को कंप्रेश कर 30 से 40 किलो की गठरी के तौर पर तैयार कर देती है। नगर पंचायत केदारनाथ के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार केदार धाम में पहले एक हफ्ते ही करीब एक हजार किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्रित किया जा चुका है, जिसे अब बेचा जाएगा। इससे नगर पंचायत को राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि कांच, टिन सहित दूसरे कचरे को भी मौके पर ही जमा किया जा रहा है, बाद में इसे भी सोनप्रयाग लाकर कबाड़ के तौर पर बेचा जाएगा। धाम में दो शिफ्ट में सुबह-शाम सफाई कराई जा रही है। इसके लिए 55 सफाईकर्मी नियुक्त किए गए हैं, जबकि यात्र मार्ग पर दूसरी संस्था द्वारा सफाई कराई जा रही है। इस कारण धाम में स्वच्छता बनी हुई है। उधर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सूबे के पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते खतरे को बेहद संजीदगी से लिया है और उन्होंने भी उत्तराखंड पहुंचने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील करते हुए कहा है कि देवभूमि को अपने नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए जाना जाता है। इसलिए यहां आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री से हमारी विनम्र अपील है कि वो प्लास्टिक वेस्ट या अन्य तरह का कचरा इधर-उधर न डाले तथा सरकार एवं प्रबंधन का सहयोग करें ।
