साइबर एक्सपर्ट ने चेताया : ‘खतरनाक’ हो सकता है ‘1980 की फोटो’ लुक पोस्ट करने का ट्रेंड
साइबर अपराध का हो सकते हैं शिकार, डाटा लीक होने के साथ-साथ डीपफेक वीडियो बनाए जाने का खतरा भी बरकरार
रुद्रपुर। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रहे सन 1980 की रेट्रो एआई फोटो पोस्ट करने का ट्रेंड धीरे-धीरे एक महामारी की शक्ल अख्तियार करता जा रहा है। सोशल मीडिया का उपयोग करने वाला लगभग हर व्यक्ति इस ट्रेंड को बिना कुछ सोचे अविवेक पूर्ण ढंग से फॉलो कर रहा है। इस ट्रेंड को पागलों की तरह फॉलो करने वाले लोगों को इस बात का तनिक भी एहसास नहीं है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 1980 का रेट्रो एआई फोटो का यह ट्रेंड दिखने में जितना मजेदार और पुराने समय के चलन का अहसास कराने वाला है, इसके पीछे उतने ही बड़े खतरे छिपे हुए हैं ।साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे गंभीर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के खतरे मौजूद हैं। इस ट्रेंड के तहत लोग अपनी सामान्य फोटो को एआई चौटबॉट्स या ऐप्स में अपलोड करके उन्हें 1980 के दशक के रेट्रो लुक में बदल रहे हैं, जिसकी कि उन्हें भविष्य में भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और पुलिस ;तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरोद्ध द्वारा जारी की गई चेतावनियों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी एक साफ और हाई-क्वालिटी फोटो किसी एआई टूल या ऐप पर अपलोड करता है, तो वह अनजाने में अपने चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा उस कंपनी के सर्वर को सौंप देते हैं। ऐसे में ध्यान देने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया मैं डाली गई फोटो तो कुछ दिन में गायब हो जाती है, लेकिन कंपनियां इन ओरिजिनल तस्वीरों को अपने सर्वर पर हफ्रतों या महीनों तक रखती हैं। चैट जीपीटी में व्यक्ति का डेटा 30 दिनों तक और जेमिनी में डिफॉल्ट रूप से 18 महीने तक सुरक्षित रह सकता है। ऐसे में अगर व्यक्ति का डाटा अथवा तस्वीर किसी शरारती तत्व के हाथ लग जाए तो वह व्यक्ति किसी की साफ चेहरे वाली तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करके मॉफ्रर्ड तस्वीरें या डीपफेक वीडियो बड़ी आसानी से बना सकता है और ऐसे डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग या ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा कई ऐप्स इन तस्वीरों का उपयोग अपने एआई मॉडल्स को और बेहतर बनाने की ट्रेनिंग के लिए भी कर सकते हैं। इसके अलावा पिछले चार दिनों से सोशल मीडिया पर जारी इस ट्रेंड का फायदा उठाने के लिए अब जालसाज भी एक्टिव हो गए हैं और उनके द्वारा सोशल मीडिया पर Úी या अनलिमिटेड रेट्रो फोटो बनाने का झांसा देकर संदिग्ध लिंक शेयर किए जा रहे हैं। इन लिंक्स के जरिए यूजर्स से अनवेरीफाइड एपीके डाउनलोड कराई जा रही हैं, जो फोन में मालवेयर इंस्टॉल कर देती हैं और फोन से बैंकिंग या पर्सनल डेटा चोरी कर सकती हैं। चिंता की बात तो यह है की व्यक्ति के द्वारा पोस्ट की गई ओरिजिनल तस्वीरों में सिर्फ उसका चेहरा भर नहीं होता ,बल्कि तस्वीरों के साथ एक्सइफि मेटाडेटा जैसे फोटो कब ली गई, किस फोन से ली गई और लोकेशन के जीपीएस कोऑर्डिनेट्स भी अपलोड हो जाता है।इसके अलावा, बैकग्राउंड में दिख रही संवेदनशील चीजें जैसे घर का पता, आईडी कार्ड या बच्चों के स्कूल की जानकारी भी कंपनियों के सर्वर पर चली जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अनरजिस्टर्ड या असुरक्षित थर्ड-पार्टी ऐप्स में अपलोड किया गया पर्सनल डेटा और तस्वीरें लीक होकर डार्क वेब पर बेची जा सकती हैं, जिसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी या प्रोफाइलिंग के लिए होता है। लिहाजा इस ट्रेंड को फॉलो करने से बचे और किसी भी रैंडम लिंक या अज्ञात थर्ड-पार्टी ऐप पर अपनी तस्वीरें अपलोड न करें। अगर ट्रेंड फॉलो करना ही है, तो पूरी फोटो अपलोड करने के बजाय सिर्फ अपना चेहरा क्रॉप करके अपलोड करें और सुनिश्चित कर ले की बैकग्राउंड में कोई निजी जानकारी न हो। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध एआई टूल्स का इस्तेमाल करते समय सेटिंग्स में जाकर मॉडल ट्रेनिंग को को बंद कर दें और काम होने के बाद अपनी चौट हिस्ट्री डिलीट कर दें।
