उत्तराखंड में भी ‘बंगाल मॉडल’ अपनाने की तैयारी में भाजपा
चुनावी घोषणाओं एवं बड़ी जनसभाओं निर्भर रहने के बजाय छोटे स्तर के प्रभावी कार्यक्रमों पर ज्यादा फोकस करेगा सत्ताधारी दल, डिजिटल एवं एआई आधारित माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल पर भी होगा काम
देहरादून। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हैरतअंगेज जीत हासिल करने के बाद भाजपा बंगाल का जीत मॉडल उत्तराखंड में भी अपने की तैयारी में है प्रस्तावित आगामी विधानसभा चुनाव के मध्य नजर भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस आजकल उन विधानसभा सीटों पर है, जहां पिछली बार उसे हार का सामना करना पड़ा था या जहां जीत का अंतर बहुत कम रहा था। भाजपा के संगठन सूत्रों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में संगठन को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। चिन्हित विधानसभा का बूथ स्तर तक डेटा तैयार कर लिया गया है तथा स्थानीय समीकरणों का भी अध्ययन किया जा रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर छोटे अंतर से जीत-हार तय हो सकती है, इसलिए हर बूथ की स्थिति मजबूत करना जरूरी है। जिलों से फीडबैक लिया जा चुका है। क्षेत्रीय नेताओं से रिपोर्ट मंगाई गई है।भाजपा संगठन सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन उत्तराखंड में अब ‘बंगाल मॉडल’ पर काम कर रहा है। इस मॉडल के तहत हर बूथ को स्वतंत्र इकाई मानकर वहां संगठन की पूरी टीम बनाई जा रही है। प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार के अनुसार प्रत्येक बूथ पर 11 सदस्यों की टीम गठित की जा रही है। इन टीमों में स्थानीय कार्यकर्ता, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और लाभार्थी संपर्क के जिम्मेदार शामिल किए जा रहे हैं। साथ ही पन्ना प्रमुखों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। जिससे मतदाता सूची के हर परिवार तक पार्टी की सीधी पहुंच बनाई जा सके। भाजपा का हमेशा से मानना रहा है कि बूथ प्रबंधन मजबूत होने से चुनावी परिणाम पर सीधा असर पड़ता है। इस बार पार्टी का जोर बड़े आयोजनों से अधिक छोटे कार्यक्रमों पर रहेगा। भाजपा संगठन गांव, वार्ड और बूथ स्तर पर नियमित बैठकें करेगा। हर महीने होने वाली इन बैठकों में स्थानीय समस्याएं, सरकार की योजनाओं का प्रभाव और विपक्ष की गतिविधियों पर रिपोर्ट ली जाएगी। लाभार्थी संपर्क अभियान को भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित लोगों के साथ छोटे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें उज्ज्वला, पीएम आवास, आयुष्मान, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच बनाकर राजनीतिक समर्थन मजबूत करने की कोशिश होगी। इसके अलावा भाजपा उत्तराखंड में इस बार तकनीक आधारित चुनाव प्रबंधन पर भी काम कर रही है। पार्टी डिजिटल डेटा, सोशल मीडिया और एआई आधारित माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल तैयार कर रही है। इसका मकसद विधानसभा वार मतदाताओं के व्यवहार, स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक रुझानों का विश्लेषण करना है। संगठन सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और शहरी मतदाताओं तक अधिक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग डिजिटल कंटेंट तैयार किया जा रहा है। स्थानीय मुद्दों के आधार पर संदेश तैयार कर मतदाताओं तक पहुंचाने की योजना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में माइक्रो-मैनेजमेंट मॉडल बेहद प्रभावी साबित हो सकता है। यहां कई सीटों पर जीत का अंतर बहुत कम होता है। भाजपा इसी तथ्य को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति को मजबूत कर रही है।
