INDIA गठबंधन की रैली में राहुल गांधी का मोदी सरकार बड़ा हमला: ‘देश में वर्षों से हो रही वोट चोरी’, “हम लोकतंत्र को हिंदुस्तान में खत्म नहीं होने देंगे”
विपक्षी नेताओं का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला
नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित INDIA ब्लॉक की रैली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में वर्षों से वोट चोरी हो रही है और मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित 2024 के लोकसभा चुनाव में भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र को हिंदुस्तान में खत्म नहीं होने देंगे और संविधान को नष्ट नहीं होने देंगे।”

चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सीधा निशाना
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और ईवीएम के माध्यम से भी चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है।उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। उनके मुताबिक, यह संख्या देश के कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच करीब तीन प्रतिशत का अंतर था।राहुल गांधी ने इन आंकड़ों के आधार पर 2024 के चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की संख्या, समयावधि और उसके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की भविष्यवाणी
रैली में राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि वह अपने पद से हटेंगे और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं सामान्य मामला नहीं हैं, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय हैं।उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की जनता चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है।

RSS पर संस्थाओं को नियंत्रित करने का आरोप
राहुल गांधी ने अपने भाषण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED), न्यायपालिका, नौकरशाही और पुलिस जैसी संस्थाओं पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि देश की संस्थाएं किसी सरकार, राजनीतिक दल या संगठन की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि युवाओं और आम जनता की हैं।
अडानी-अंबानी का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता ने आर्थिक असमानता और किसानों-मजदूरों की समस्याओं का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में केंद्रित होती जा रही है।राहुल गांधी ने अडानी और अंबानी का नाम लेते हुए बड़े उद्योगपतियों के कर्ज और छोटे किसानों तथा मजदूरों की आर्थिक परेशानियों के बीच अंतर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसा हिंदुस्तान उन्हें स्वीकार नहीं है, जहां आम आदमी को आर्थिक संकट का सामना करना पड़े और बड़े कारोबारी प्रभावशाली स्थिति में बने रहें।
‘हमें दो-तीन लोगों का देश नहीं चाहिए’
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि देश की आर्थिक और संस्थागत व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के नियंत्रण में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने हवाई अड्डों, रेलवे, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निजी उद्योगपतियों की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने शिव की बारात का उदाहरण देते हुए समावेशी भारत की कल्पना प्रस्तुत की और कहा कि ऐसा देश होना चाहिए जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और अधिकार मिलें।
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मोदी और अमित शाह को भी दी राजनीतिक चुनौती
रैली के अंत में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेकर कहा कि विपक्ष उनके सामने राजनीतिक चुनौती पेश करता रहेगा। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के मुद्दे के बाद भी विपक्ष सरकार से जवाब मांगना जारी रखेगा।रामलीला मैदान की इस रैली में राहुल गांधी के भाषण ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची में संशोधन, ईवीएम, चुनाव आयोग की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वोट चोरी और संस्थाओं पर नियंत्रण के आरोप राजनीतिक दावे हैं। इनकी पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों, मतदाता सूची में बदलाव के रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी साक्ष्यों की जांच जरूरी है।



खरगे बोले- मोदी को हटाएंगे तभी बचेगा लोकतंत्र
नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की विशाल रैली में विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर हमला बोला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, कथित वोट चोरी, मतदाता सूची में नाम काटे जाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।रैली में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर आरोप लगाया कि देश में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए INDIA गठबंधन अपनी लड़ाई जारी रखेगा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारों को निशाने पर लेते हुए उन्हें ‘चोरी की सरकारें’ बताया।खरगे ने कहा कि भाजपा को सत्ता से बेदखल किए बिना विपक्ष चैन से नहीं बैठेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी नेताओं को डराने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष इससे डरने वाला नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के लोगों को बांटने और उनके वोट छीनने की कोशिश कर रहे हैं। खरगे ने रैली में स्पष्ट शब्दों में कहा, “अगर मोदी जाएंगे, तभी लोकतंत्र बच सकता है।”


अखिलेश यादव बोले- वोट चोरी के कारण नहीं बना पाए सरकार
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की एकजुटता से यह संदेश जा रहा है कि लोकतंत्र को कमजोर करने वालों के खिलाफ विपक्ष मिलकर संघर्ष करेगा।अखिलेश यादव ने दावा किया कि करीब एक करोड़ 27 लाख वोट काटे गए। उन्होंने 403 विधानसभा क्षेत्रों के संदर्भ में मतदाता सूची में हुए बदलावों पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बीच चुनाव जीतने में असमर्थ होने के कारण चुनाव आयोग का सहारा ले रही है। अखिलेश ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव के विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने उस समय भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ कथित साजिश को उजागर किया था।पश्चिम बंगाल के चुनाव और वहां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए।अखिलेश यादव ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार नहीं बन पाने के पीछे भी वोट चोरी एक प्रमुख कारण था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।

तेजस्वी यादव बोले- बिहार से शुरू हुई वोट चोरी
राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी रैली में वोट चोरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कथित वोट चोरी की शुरुआत बिहार से हुई।तेजस्वी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसे ‘दो नंबरी’ बताया। उनके भाषण से स्पष्ट रहा कि विपक्ष बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति अपना रहा है।


ममता बनर्जी बोलीं- EVM लूटा, लोकतंत्र लूटा, संविधान लूटा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने रामलीला मैदान से केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा, “हम हारे नहीं, हराए गए हैं।”ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई है।उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतगणना प्रक्रिया को हाईजैक करने का आरोप लगाया और उन्हें पद से हटाने की मांग की। ममता ने यह भी दावा किया कि SIR की प्रक्रिया भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।उन्होंने EVM, लोकतंत्र और संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष इन मुद्दों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। इसके अलावा उन्होंने राम मंदिर के लिए जुटाए गए धन को लेकर भी सवाल उठाए।


फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत अन्य नेताओं ने भी रखी बात
रैली में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी हिस्सा लिया। इन नेताओं की मौजूदगी ने INDIA गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की।विपक्षी नेताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, संविधान की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं।





