हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत कर्नाटक निवासी छह लोगों की मौत, जवानों ने शुरू किया रेस्क्यू अभियान
हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जांच (एएआईबी) और डीजीसीए की विशेषज्ञ टीम करेगी
ज्योतिर्मठ। बदरीनाथ धाम से तीर्थयात्रियों को लेकर देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड जा रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर हाथी पहाड़ की चोटी पर चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। दुर्घटना दोपहर करीब दो बजे ज्योतिर्मठ के चांई गांव और लामबगड़ के बीच हुई। टक्कर के बाद हेलीकॉप्टर में आग लग गई और वह बुरी तरह जल गया। हादसे के बाद ट्रांस भारत एविएशन की सभी हेलीकॉप्टर सेवाओं पर रोक लगा दी गई है।ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, मृतकों में दिल्ली निवासी पायलट हिमांशु सभरवाल (48) और कर्नाटक निवासी प्रताप (41), अरुण सालुंके (44), वीबी शंकर गौड़ा (39), सुधीर के. (50) और एचएस नटराजा (51) शामिल हैं।हादसे में मारे गए सभी छह लोगों के शव शुक्रवार देर रात सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे, लेकिन अंधेरा और दुर्गम रास्ता होने के कारण शवों को सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। शनिवार सुबह सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी के जवानों ने दोबारा रेस्क्यू अभियान शुरू किया। घटनास्थल से सड़क तक करीब 10 किलोमीटर का पैदल रास्ता है। प्रशासन के अनुसार, शव बुरी तरह क्षत-विक्षत होने के कारण रेस्क्यू अभियान में कठिनाई आ रही है। हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और डीजीसीए की विशेषज्ञ टीम करेगी। जांच के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इस वर्ष चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में यह पहला हेलीकॉप्टर हादसा बताया जा रहा है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के सीईओ प्रतीक जैन ने बताया कि हेलिकॉप्टर दुर्घटना की जांच डीजीसीए व एएआईबी की विशेषज्ञों की टीम करेगी। शनिवार को टीम उत्तराखंड पहुंच कर घटनास्थल पर निरीक्षण करेगी।
13 वर्षों में आठ बड़े हादसे, 48 की मौत
उत्तराखंड में पिछले 13 वर्षों के दौरान आठ बड़े हेलीकॉप्टर हादसों में 48 लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान पांच हेलीकॉप्टर हादसे हुए थे। इनमें तीन घटनाओं में आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि उत्तरकाशी और केदार घाटी में हुई दो दुर्घटनाओं में पायलट समेत 13 लोगों की मौत हुई थी। लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार और डीजीसीए ने हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए थे।


