किच्छा नगर पालिका चुनावः कांग्रेस के बागी जीवन जोशी, भाजपा की बागी शैली फुटेला, लवी सहगल ने नामांकन पत्र वापस लिए
भाजपा-कांग्रेस के 1-1 बागी के चुनाव मैदान में रहने से हो गया कड़ा मुकाबला, सात प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए
किच्छा। नगर पालिका परिषद किच्छा के अध्यक्ष पद के चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। रविवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि पर दोपहर तीन बजे तक कुल सात प्रत्याशियों ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। वहीं भाजपा और कांग्रेस से जुड़े एक-एक बागी प्रत्याशी ने अंतिम समय तक नामांकन वापस नहीं लिया और अब वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। नाम वापसी की अंतिम समय सीमा रविवार दोपहर तीन बजे निर्धारित थी। निर्धारित समय तक यूकेडी प्रत्याशी अनिल पांडे, कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के डमी उम्मीदवार के रूप में नामांकन करने वाली वंदना सिंह, कांग्रेस के बागी जीवन जोशी, आयशा बी, भाजपा की बागी शैली फुटेला, लवी सहगल तथा निर्दलीय प्रत्याशी विशाल मदान ने अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। वहीं व्यापार मंडल अध्यक्ष विजय अरोड़ा का नामांकन पूर्व में ही निरस्त हो चुका था। इसके बाद नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने पर अध्यक्ष पद के चुनाव की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई। नाम वापसी की अंतिम समय सीमा तक कांग्रेस के बागी अब्दुल रशीद जक्कू तथा भाजपा के बागी नरेंद्र सिंह टाकुली ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया। दोनों प्रत्याशियों के मैदान में बने रहने से भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने बागियों की चुनौती भी कायम हो गई है। अब किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी संदीप अरोड़ा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह के साथ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र सिंह टाकुली और अब्दुल रशीद जक्कू चुनाव मैदान में आमने-सामने होंगे।
चार प्रत्याशियों के बीच होगा मुकाबला
नाम वापसी के बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में अब चार प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ दोनों प्रमुख दलों के बागियों के चुनाव मैदान में बने रहने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। बागी प्रत्याशियों के मैदान में डटे रहने से दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने-अपने वोट बैंक को साधने की चुनौती बढ़ गई है। नाम वापसी के साथ ही चुनावी तस्वीर साफ होने के बाद अब प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने प्रचार अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में चारों प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जोर-शोर से जनसंपर्क किया जाएगा। किच्छा पालिकाध्यक्ष की कुर्सी के लिए होने वाला यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने उन्हीं दलों से जुड़े बागी प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में बागियों को मिलने वाला समर्थन चुनाव के नतीजों पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।
