किच्छा-सिरौलीकलां में चुनावी सरगर्मी तेज, कांग्रेस में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त, भाजपा में तस्वीर अभी साफ नहीं
किच्छा। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगर पालिका परिषद किच्छा एवं नगर पालिका परिषद सिरौलीकलां के अध्यक्ष और सभासद पदों के चुनाव की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद दोनों क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव कार्यक्रम सामने आते ही विभिन्न राजनीतिक दलों में अध्यक्ष पद और वार्ड सदस्य पद के लिए संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार दोनों निकायों में 22 सितंबर को मतदान और 24 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। नामांकन प्रक्रिया 10 और 11 सितंबर को होगी।चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस में टिकट की दावेदारी करने वालों की तस्वीर अपेक्षाकृत तेजी से सामने आने लगी है। किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश प्रताप सिंह, नगर अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बबलू भाई, गुलशन सिंधी, महिला नेत्री सुनीता कश्यप, कांग्रेस कार्यकर्ता जीवन जोशी और ओमप्रकाश दुआ के नाम चर्चा में हैं। पूर्व नगर अध्यक्ष अरुण तनेजा के नाम की भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। वहीं अरुण कुमार उर्फ किन्नू शुक्ला का नाम भी संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है, हालांकि उनकी ओर से अभी तक खुलकर दावेदारी सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।




दूसरी ओर भाजपा में किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर अभी स्थिति कांग्रेस की अपेक्षा ज्यादा शांत दिखाई दे रही है। भाजपा की ओर से संदीप अरोड़ा उर्फ सोनू ने खुलकर अपनी दावेदारी सामने रखी है। इसके अलावा पूर्व में संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में रहे संजीव खन्ना, महेंद्र पाल, राजीव सक्सेना, दिनेश भाटिया और नवी सहगल सहित अन्य नामों को लेकर अभी सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में भाजपा की ओर से प्रत्याशी चयन को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षकों और कार्यकर्ताओं की निगाहें पार्टी के निर्णय पर टिकी हैं।

सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद में भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बनते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एनयू खान, अफसार कुरैशी, सईदुल रहमान और तस्लीम राजा के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। वहीं भाजपा की ओर से अभी तक अध्यक्ष पद के लिए कोई स्पष्ट सार्वजनिक दावेदारी सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए आने वाले दिनों में कई नए नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सिरौलीकलां से बाबू अल्वी का नाम भाजपा के संभावित दावेदार के तौर पर चर्चा में है। इन चुनावी गतिविधियों के बीच किच्छा और सिरौलीकलां की सीमा एवं नगर निकाय के गठन से जुड़ा पुराना न्यायिक विवाद भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। पूर्व में सिरौलीकलां को किच्छा नगर पालिका का हिस्सा रखने और बाद में पृथक निकाय गठित करने को लेकर विभिन्न न्यायिक कार्यवाहियां हुई हैं। उपलब्ध न्यायिक अभिलेखों के अनुसार इस विषय में किच्छा नगरपालिका से सिरौलीकलां क्षेत्र को अलग करने तथा पृथक नगरपालिका गठित करने से संबंधित अधिसूचनाओं को लेकर न्यायालय में मामले विचाराधीन रहे हैं।
इस पूरे मामले में पूर्व में न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशों का भी उल्लेख न्यायिक रिकॉर्ड में मिलता है। हालांकि वर्तमान चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए किसी भी न्यायिक कार्यवाही के अंतिम प्रभाव के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित न्यायालय के आदेश का इंतजार करना आवश्यक होगा। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि न्यायिक प्रक्रिया और निर्वाचन प्रक्रिया दोनों अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।अब जबकि निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है, दोनों नगर पालिका क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशी अपने-अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। कांग्रेस में जहां दावेदारों की संख्या लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है, वहीं भाजपा में टिकट को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है। दोनों दलों के पर्यवेक्षकों द्वारा संभावित प्रत्याशियों की राजनीतिक पकड़, जनाधार और स्थानीय समीकरणों का आकलन किए जाने की चर्चा है।कुल मिलाकर किच्छा और सिरौलीकलां में चुनावी माहौल पूरी तरह बन चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल प्रत्याशियों के नामों को लेकर है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद यह भी स्पष्ट होगा कि किन दावेदारों को पार्टी का अधिकृत समर्थन मिलता है और कौन निर्दलीय अथवा अन्य विकल्पों के साथ चुनाव मैदान में उतरता है। ऐसे में आगामी कुछ दिन दोनों नगर पालिका क्षेत्रों की स्थानीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
