साइबर ठगों ने 24 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा , रिटायर्ड लेडी प्रिंसिपल से 73.60 लाख ठगे
मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई अधिकारी बनकर बनाया दबाव, फर्जी पुलिस सेटअप में वीडियो कॉल कराते रहे निगरानी का भरोसा
देहरादून (उद संवाददाता)। साइबर ठगों ने मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बनकर शहर की एक सेवानिवृत्त लेडी प्रिंसिपल को 24 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और केस में फंसाने का डर दिखाकर 73-60 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने महिला को आठ अगस्त से 31 अगस्त तक घर में ही कैद रहने के लिए मजबूर किया। उन्हें किसी से भी इस मामले में बातचीत न करने की सख्त हिदायत दी गई थी। ठगी का पता तब चला, जब महिला के डॉक्टर बेटे को मां के व्यवहार में अचानक आए बदलाव पर शक हुआ। उसने बिना बताए मां का मोबाइल फोन चेक किया तो वॉट्सऐप चौट और बैंक खातों में हुए लेनदेन से पूरा मामला सामने आ गया। बेटे की शिकायत पर साइबर अपराध थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आठ अगस्त को सेवानिवृत्त लेडी प्रिंसिपल के पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके पहचान पत्र पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल करोड़ों रुपये के घोटाले में किया गया है। इसके बाद महिला को मुकदमे और तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। लगातार पूछताछ और कार्रवाई का भय पैदा कर ठगों ने उन्हें मानसिक दबाव में ले लिया। महिला को बताया गया कि वह एक गंभीर मामले में फंस गई हैं और जांच पूरी होने तक उन्हें उनके निर्देशों का पालन करना होगा। महिला को अपने झांसे में पूरी तरह लेने के लिए ठगों ने बाकायदा फर्जी पुलिस कार्यालय जैसा माहौल तैयार किया। आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर वॉट्सऐप वीडियो कॉल करते थे। वीडियो कॉल के दौरान महिला को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वह वास्तविक जांच एजेंसी की निगरानी में हैं। उन्हें 24 घंटे निगरानी में रहने और घर से बाहर कदम नहीं निकालने के निर्देश दिए गए। साथ ही किसी परिजन अथवा अन्य व्यक्ति को मामले की जानकारी देने से भी रोक दिया गया। लगातार वीडियो कॉल और धमकियों के कारण महिला इस कदर डर गईं कि उन्होंने ठगों के निर्देशों का विरोध करने के बजाय उनके बताए अनुसार रकम भी ट्रांसफर करनी शुरू कर दी। डिजिटल अरेस्ट के 24 दिनों के दौरान आरोपियों ने महिला से अलग अलग बैंक खातों में कुल 73-60 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने महिला को बताया कि केस से उनका नाम हटाने और जांच में क्लीयरेंस देने की प्रक्रिया के लिए रकम जमा करनी होगी। महिला को यह भी भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने तक उनका पैसा रिजर्व बैंक के पास सुरक्षित रहेगा और बाद में पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। गिरफ्तारी और मुकदमे के डर से महिला ने ठगों की बात पर भरोसा करते हुए रकम उनके बताए बैंक खातों में भेज दी।ठगी के दौरान महिला इतनी भयभीत हो गई थीं कि उन्होंने अपने डॉक्टर बेटे से बातचीत तक बंद कर दी। वह उससे अलग रहने लगीं और घर में रहते हुए भी लगातार फोन पर ठगों के संपर्क में बनी रहीं। महिला के पति को जब उनके बदले व्यवहार का पता चला तो उन्होंने भी समझाने का प्रयास किया, लेकिन ठगों ने जिस तरह महिला के मन में मुकदमे और गिरफ्तारी का डर बैठा दिया था, उसके कारण वह पति की बात सुनने को भी तैयार नहीं हुईं। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि आिखर महिला अचानक सबसे दूरी क्यों बनाने लगी हैं। मां के व्यवहार में लगातार बदलाव और परिवार से दूरी को लेकर डॉक्टर बेटे को गहरा शक हुआ। उसने मां को बिना बताए उनका मोबाइल फोन चेक किया। मोबाइल में वॉट्सऐप पर हुई बातचीत और बैंक खातों से किए गए लेनदेन को देखकर वह हैरान रह गया। इसके बाद उसे समझ आया कि उसकी मां कई दिनों से साइबर ठगों के जाल में फंसी हुई हैं और आरोपियों के डर के कारण परिवार से भी बात नहीं कर रही थीं। बेटे ने मामले की जानकारी जुटाने के बाद तत्काल साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और सोमवार को साइबर अपराध थाना पुलिस में भी शिकायत दी।साइबर अपराध थाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर अज्ञात ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें 73.60 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। खातों के लेनदेन, रकम के आगे किए गए हस्तांतरण और खाताधारकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही महिला के पास वीडियो कॉल करने वाले मोबाइल नंबरों और फर्जी वॉट्सऐप खातों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है
