August 29, 2026

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देवीधुरा में फलों और फूलों से खेली गई बग्वाल, सीएम धामी में मेले में हुए शामिल

चम्पावत। विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां वाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह के इस अनूठे संगम का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान चार खाम और सात थोक के बीच सदियों पुरानी बग्वाल की परंपरा निभाई गई। इस वर्ष पाषाण युद्ध की जगह फल और फूलों का प्रयोग किया गया। दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई बग्वाल 1 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बग्वाल मेले में शामिल होने के लिए हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की प्रस्तुति के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ मां वाराही देवी की विधिवत पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए मां वाराही से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कहते हुए यहां 9 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बहुमंजिला पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ व्यवस्थाओं को भी अधिक सुदृढ़ किया गया है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल के सौंदर्यीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1 करोड़ 95 लाख रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4 करोड़ 70 लाख रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की लागत से पथ प्रकाश व्यवस्था के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर और डुंगरी फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के तहत 68 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों का विकास करना नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी करने का आ“वान किया। पाटी विकासखंड स्थित मां वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा अर्चना के बाद बग्वाल का शुभारंभ हुआ। इसके बाद वालिक, चम्याल, गहड़वाल और लमगड़िया खाम के बग्वालियों ने मैदान में प्रवेश किया। अलग अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों और पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और मां वाराही के जयकारों के बीच ऐतिहासिक परंपरा शुरू हुई। फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंज उठा। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाराही सभी की चिंता करती हैं और यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा एक दूसरे से गले मिलते हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी भी बांधी। मुख्यमंत्री ने इसे अपने लिए भावनात्मक क्षण बताते हुए सभी को पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, मां वाराही मंदिर समिति अध्यक्ष हीराबल्लभ जोशी, भाजपा जिला अध्यक्ष गोविन्द सामन्त, मुख्य विकास अधिकारी जीएस खाती, परियोजना निदेशक अजय सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी देवेश चौहान, महेन्द्र पाल, दर्जा राज्य मंत्री मुकेश महराना, हुकुम सिंह कुँवर, श्याम नारायण पाण्डेय, सुभाष बगौली, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता सतीश पांडे, पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, रवि नेगी, पूर्व अध्यक्ष मंदिर समिति मोहन सिंह बिष्ट, खीम सिंह लमगड़िया, राजशेखर जोशी, नरेन्द्र लडवाल, खीमानन्द सनवाल, देवेन्द्र पन्त, त्रिलोक सिंह बिष्ट, बिरेन्द्र सिंह लमगड़िया, गंगा सिंह चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, चेतन, राजेश बिष्ट, जगदीश सिंह सिनग्वाल, मंच संचालक कीर्तिबल्लभ जोशी, हयात सिंह बिष्ट, बिशन सिंह चम्याल, राजेन्द्र बिष्ट, लक्ष्मी दत्त जोशी, दीवान सिंह बिष्ट, मदन सिंह बोरा, बहादुर सिंह नदगली, ईश्वर सिंह बिष्ट, विनोद चम्याल, रमेश राना, विनोद प्रकाश गड़कोटी, गौरव सिनग्वाल, रश्मि लमगड़िया, दीपक सिनग्वाल, पवन लमगड़िया, चन्दन बिष्ट, दीपक चम्याल, जितेन्द्र पाण्डेय, दिनेश चम्याल, विनोद जोशी और सुदीप चम्याल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।


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