‘जब इतनी बड़ी सृष्टि है तो इसका रचयिता भी जरूर होगा’: श्री राधा स्वामी सत्संग में हजूर साहब जसदीप सिंह गिल ने नाम की महिमा और आध्यात्मिकता का समझाया महत्व
हजूर साहब ने लगभग एक लाख संगत को दिए खुले दर्शन
रुद्रपुर। किच्छा रोड स्थित श्री राधा स्वामी सत्संग घर में शनिवार को हजूर साहब ने संगत को दर्शन देकर निहाल किया। हजूर साहब जसदीप सिंह गिल के सत्संग घर पहुंचने पर करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन किए। हजूर साहब ने संगत को आध्यात्मिक संदेश देने के साथ ही प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान किया। शनिवार सुबह 9ः30 से 10 बजे तक पाठी और सत्संगकर्ताओं द्वारा सत्संग किया गया। इसके बाद 10 बजे से 11ः10 बजे तक प्रश्नोत्तर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें करीब 20 श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिकता, ईश्वर के अस्तित्व, मानसिक तनाव, गृह क्लेश, नामदान और मूर्ति पूजा सहित विभिन्न विषयों को लेकर सवाल पूछे। एक श्रद्धालु ने पूछा कि आध्यात्मिकता में मन नहीं लगता तो क्या किया जाए। इस पर हजूर साहब ने कहा कि यदि कर्म काटने हैं तो आध्यात्मिकता की ओर ध्यान लगाना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोहे की जंजीर तोड़कर सोने की जंजीर यानी मोह-माया में फंसने का कोई लाभ नहीं है। आध्यात्मिकता ही वह मार्ग है, जिससे मनुष्य अपने कर्मों से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। नामदान लेने के बावजूद मूर्ति पूजा करने से जुड़े सवाल पर हजूर साहब ने कहा कि जैसे-जैसे व्यक्ति की आध्यात्मिक समझ बढ़ती है, वह स्वयं इस बात को समझने लगता है। उन्होंने इसे छोटी कक्षा से धीरे-धीरे बड़ी शिक्षा प्राप्त करने जैसा बताया। प्रश्नोत्तर के दौरान मानसिक तनाव और गृह क्लेश से जुड़े सवाल भी श्रद्धालुओं ने पूछे। हजूर साहब ने इन समस्याओं को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाते हुए संगत को नाम और आध्यात्मिक साधना से जुड़ने का संदेश दिया। प्रश्नोत्तर के दौरान एक श्रद्धालु ने पूछा कि बाबा जी यहां क्यों नहीं पहुंचे। इस पर हजूर साहब ने बेहद विनम्रता से कहा, मेरी ऐसी क्या मजाल जो मैं पूछूं कि बाबा जी आप यहां क्यों नहीं पहुंचे। मैं तो दास हूं, मुझे तो फरमाया गया था कि आप जाओ और मैं आ गया। हजूर साहब के इस सहज और विनम्र जवाब से संगत भावविभोर हो गई। प्रश्न उत्तर कार्यक्रम में हजूर जसदीप सिंह गिल जी महाराज ने हमें उस मालिक का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिसने हमें सृष्टि की सर्वाेच्च योनि इनसान/मनुषय के रूप में इस धरती पर जन्म देकर हमारा लालन पालन कर रहे हैं। एक सत्संगी के प्रश्न क्या नामदान मिलने के बाद पूजा पाठ करना चाहिए, के उत्तर में कहा जो भी प्रक्रिया हमें परमात्मा/मालिक की तरह ले जाता है वह अच्छा है ।हजूर ने कहा मूर्ति पूजा मन को एकाग्र करने के लिए करते हैं साथ ही कहा हमें सही रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा असली तो नाम व शब्द की भक्ति है,यह समस्त पूजा पाठ से ऊपर है लेकिन हमें इसकी सही युक्ति को समझना जरूरी है ताकि हम गलत रास्ते पर ना भटक जाएँ। एक जिज्ञासु ने पूछा कि नामदान क्या है तो हजूर जी ने फरमाया नामदान के समय हमें युक्ति बताई जाती है कि हम परमात्मा के साथ अपना रिश्ता कैसे बनाएँगे और अपने निज घर कैसे जाएंगे ।उन्होंने कहा वह जीव बहुत भाग्यशाली है जिसको पूरा गुरु मिल गया है साथ ही कहा नामदान कोई जादू या चमत्कार नहीं है यह तो करनी का मार्ग है आप सुमिरन भजन करोगे अन्तर में प्रकाश व शब्द धुन को सुनेंगे तो आपको मोक्ष की प्राप्ति हो जायेगी और इस 84 लाख योनियों में दुबारा नहीं आना पड़ेगा ।एक प्रश्न के उत्तर में हजूर जसदीप सिंह जी ने कहा दर्शन एक अवस्था है,हमारी सोच क्या है,हमें दर्शन की भावना बनानी है चूँकि हम जिसके बारे में सोचते हैं उसीके दर्शन होते हैं साथ ही कहा दर्शन किए नहीं वरन दिए जाते हैं ।कई जिज्ञासुओं के प्रश्नों के उत्तर में हजूर जी ने कहा मोबाइल हमारे हितों को साधने के लिए बनाया गया था लेकिन हम ही नहीं आजके युवा व बच्चे गंदी गंदी रीलें देखकर गलत रास्ते पर चल पड़े हैं जो उनकी जिंदगी को तबाह कर रहे हैं और भी अनेक जिज्ञासुओं के हजूर जसदीप सिंह गिल जी ने उत्तर दिये। इसके बाद हजूर जसदीप सिंह गिल जी ने सत्संग पंडाल में बैठे करीब एक लाख से अधिक लोगों को खुलीं कार में दर्शन दिए । इससे पूर्व सत्संग कर्ता द्वारा करीब आधा घंटा सत्संग करते हुए नाम की भक्ति के बारे में विस्तार से बताया गया। बारिश के कारण पार्किंग स्थलों में पानी भरने के कारण श्रद्धालुओं को जहां जगह मिली वहीं गाड़ी को खड़ा कर दिया लेकिन बाद में उनकी गाड़ी कीचड़ में फँस जाने के कारण बहुत परेशानी हुई ।लंगर व कैंटीन में जबरदस्त भीड़ देखी गई लेकिन व्यवस्थाओं के बेहतर होने व सबकुछ मिलने के कारण लोगों को परेशानी नहीं हुई। समस्त व्यवस्थाओं के लिए राधास्वामी सत्संग ब्यास के जोनल सेक्रेटरी गुरविनदर सिंह,प्रदेश सचिव हरीश मुंजाल, एरिया सेक्रेटरी दीपक गुम्बर,अध्यक्ष सोनिया कालरा,सचिव ध्रुव मुंजाल,वरूण मदान,सूरज कालरा,चरणजीत कौर,तरुण अरोरा,चिराग आहूजा,रिषि चुघ,दीपक गुम्बर,हरीश सेतिया,अशोक छाबड़ा, भारत भूषण चुघ आदि दिन रात जी जान से जुटे हुए थे ।
- नाम की महिमा में ध्वनि और प्रकाश की दी थ्योरी
रूद्रपुर। इसी संदर्भ में हजूर साहब ने ब्रह्मांड की उत्पत्ति का आध्यात्मिक उल्लेख करते हुए कहा कि जब इस भूमंडल पर कुछ भी नहीं था, तब भी शब्द और प्रकाश मौजूद थे। उन्होंने बताया कि सृष्टि की शुरुआत में ध्वनि के साथ विस्फोट हुआ और प्रकाश दिखाई दिया। ध्वनि शुरू से ही मौजूद रही और यही शब्द आध्यात्मिक रूप से नाम से जुड़ा हुआ है। हजूर साहब ने संगत को समझाया कि जिस प्रकार किसी रचना को देखकर उसके रचयिता का बोध होता है, उसी प्रकार इतनी विशाल सृष्टि को देखकर उसके रचयिता के अस्तित्व को समझा जा सकता है। उन्होंने संगत को बाहरी मोह-माया में उलझने के बजाय आध्यात्मिक मार्ग से जुड़ने का संदेश दिया। - ‘क्या ईश्वर मौजूद है?’ सवाल पर दिया चित्र और चित्रकार का उदाहरण
रूद्रपुर। प्रश्नोत्तर के दौरान एक श्रद्धालु ने हजूर साहब से महत्वपूर्ण सवाल किया कि क्या ईश्वर वास्तव में मौजूद है? इस पर हजूर साहब ने बेहद सहज उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई चित्र है तो उसे बनाने वाला चित्रकार भी जरूर होगा। जब यह पूरी सृष्टि इतनी विशाल और अद्भुत रचना है तो इस कृति को बनाने वाला भी अवश्य मौजूद होगा। ईश्वर के अस्तित्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जिस विशाल सृष्टि को अपने सामने देख रहा है, उसके पीछे किसी रचनाकार का होना स्वाभाविक है। आध्यात्मिक मार्ग मनुष्य को इसी सत्य को समझने और अनुभव करने की दिशा में ले जाता है।
