भारी बारिश से मकान ढहा, चार दबे, एक की मौत
भारी बारिश से कई इलकों में जनजीवन अस्त व्यस्त,भूस्खलन से कई सड़कें बंद
कोटद्वार (उद संवाददाता)। पर्वतीय क्षेत्रें में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। द्वारीखाल ब्लॉक के मेहरगांव (भलगांव) में मंगलवार सुबह बारिश के कारण एक मकान अचानक ढह गया। हादसे में चार लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबा हटाकर लोगों को तलाशने का अभियान शुरू कर दिया। मौके से एक शव निकाल लिया गया है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में बीती रात से ही लगातार बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह बारिश तेज होने के बाद मेहरगांव में एक मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान के मलबे में चार लोगों के दबे होने की सूचना मिलने के बाद आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। बचाव दल और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू अभियान के दौरान 2 वर्षीय रुद्राक्ष पुत्र नवीन सिंह का शव बरामद किया गया। जबकि धीरेंद्र सिंह पुत्र प्रताप सिंह (46 वर्ष) और मथुरा देवी पत्नी प्रताप सिंह (70 वर्ष) की तलाश में प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। लगातार बारिश के कारण सिलगाड़ और लंगूरगाड़ नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। दोनों नदियों का पानी खतरे की स्थिति के करीब पहुंचने से आसपास के इलाकों में चिंता बढ़ गई है। सरुड़ा गांव में पंचायत घर और खोह नदी के किनारे बने मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन और पुलिस की ओर से संवेदनशील क्षेत्रें में लगातार निगरानी की जा रही है। लंगूरगाड़ नदी के बढ़ते प्रवाह से सुभाष बाजार वार्ड का कंडवाल मोहल्ला भी खतरे की जद में आ गया है। नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 534 पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। इसके चलते कई जगह यातायात प्रभावित हुआ है। रपटों में भी पानी का बहाव बढ़ने से आवाजाही को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन की टीमें मार्गों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ज्योतिर्मठ की उर्गम घाटी में पांचवें केदार भगवान कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पास भी भारी भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी से आया मलबा मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में जमा हो गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण क्षेत्र में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। मलबा आने से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। फिलहाल श्रद्धालु मंदिर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। मलबा हटाए जाने और रास्ता सुरक्षित होने के बाद ही आवाजाही सुचारु होने की उम्मीद है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में दो राज्य मार्गों समेत कुल 91 सड़कें बंद हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार अल्मोड़ा में पांच, बागेश्वर में 12, चमोली में 15, चंपावत में एक, देहरादून में सात, नैनीताल में 12, पौड़ी में पांच, पिथौरागढ़ में 11, रुद्रप्रयाग में सात तथा टिहरी और उत्तरकाशी में आठ आठ मार्ग बंद हैं।
