राज्य में अब 112 पर ही उपलब्ध होगी सभी आपातकालीन सेवाएं,मुख्य सचिव ने जारी किए आवश्यक दिशा निर्देश
देहरादून। राज्य में आवश्यक सेवाओं को हाईटेक करके सभी जरूरतमंद खासकर सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आपात कालीन सेवाओं को एकीकृत करने की आप कवायत आरंभ की जा रही है । इस कार्य योजना के तहत पुलिस, फायर और मेडिकल सेवाओं को हेल्पलाइन 112 से जोड़ा जाएगा तथा एम्बुलेंस में जीपीएस और वीएलटीडी उपकरण भी लगाए जाएंगे और उनकी रियल टाइम निगरानी भी 112 से ही होगी। साथ ही एक राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाकर चिकित्सा संस्थानों को जोड़ा जाएगा तथा गुड सेमेरिटन शिकायत निवारण तंत्र और पीएम राहत योजना को प्रभावी बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि इस कार्य योजना के धरातल पर साकार होने के बाद सड़क हादसे सहित अन्य आपात स्थितियों में पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता एक ही हेल्पलाइन के माध्यम से तत्काल उपलब्ध हो सकेगी।यह व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है तथा सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित ट्रॉमा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से राज्यों को जारी निर्देशों के क्रम में राज्य में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को समन्वित, प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में भी देखी जा रही है। इसके तहत अब विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आपातकालीन सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाना है। इस क्रम में मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों से सड़क दुर्घटना को लेकर अपनी अपनी भूमिका को निभाने के निर्देश देते हुए ऐसे हालात में घायलों को बेहतर सुविधा दिए जाने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ज्ञात हो कि नई व्यवस्था के तहत हेल्पलाइन 112 को पुलिस, अग्निशमन और स्वास्थ्य सेवाओं से तकनीकी रूप से जोड़ा जाएगा। इसके लिए ऐसी स्वचालित प्रणाली विकसित किए जाने की योजना है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा 112 पर आपातकालीन सहायता के लिए कॉल किए जाने पर संबंधित सेवा तक सूचना पहुंचाने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता न्यूनतम हो। कॉल की प्रकृति के आधार पर पुलिस, फायर या मेडिकल सहायता के लिए संबंधित टीम को तत्काल सक्रिय किया जा सकेगा। इससे दुर्घटना स्थल तक राहत और बचाव दल पहुंचाने के साथ ही घायल को नजदीकी उपयुक्त चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी। हासिल जानकारी के मुताबिक सभी आपातकालीन हेल्पलाइन सेवाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ ही इसकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में आम नागरिक अलग-अलग हेल्पलाइन नंबरों के बजाय सीधे 112 पर संपर्क कर सकें और उन्हें आवश्यक सहायता जल्द से जल्द मिल सके। नई कार्य योजना के तहत राज्य स्तर पर डीजी हेल्थ को नोडल अधिकारी और प्रत्येक जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस व्यवस्था के तहत नियमित रूप से मासिक बैठकें आयोजित की जाएंगी और इन बैठकों की कार्रवाही को संबंधित पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। आरंभ कवायद के तहत सभी सार्वजनिक और निजी एम्बुलेंसों में एआईएस-125 मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ ही उनमें जीपीएस और वीएलटीडी उपकरण लगाए भी जाएंगे ताकि सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वाले लोगों के सामने आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके तथा दुर्घटना स्थल के सबसे नजदीक उपलब्ध एम्बुलेंस की पहचान कर उसे तत्काल घटनास्थल पर भेजा जा सके। साथ ही एम्बुलेंस की लोकेशन और मूवमेंट की भी रियल टाइम निगरानी की जा । इसके अलावा राज्य में ट्रॉमा रजिस्ट्री स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए परिवहन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री तैयार कर सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। ट्रॉमा मामलों से संबंधित जानकारी एकत्र होने के बाद इसे राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से भी जोड़ा जाएगा। इससे सड़क दुर्घटनाओं, घायलों की स्थिति, उपचार और मृत्यु दर से जुड़े आंकड़ों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा और भविष्य में सड़क सुरक्षा एवं ट्रॉमा केयर की नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर आर्थिक और उपचार संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए पीएम राहत योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
