सीजेपी ने सरकार से बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया, पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा
विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन ,25 दिनों से सोनम वांगचुक अनशन पर
नई दिल्ली। पेपर लीक के मुद्दे पर जारी आंदोलन के बीच सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बरकरार है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार की ओर से दिए गए बातचीत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, सरकार ने संगठन के प्रतिनिधियों को चार बार औपचारिक वार्ता का निमंत्रण भेजा, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे स्वीकार नहीं किया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी समय, किसी भी स्थान पर और प्रदर्शनकारियों की सुविधा के अनुसार बातचीत करने के लिए तैयार है। इसके बावजूद सीजेपी की ओर से बातचीत शुरू नहीं होने से आंदोलन और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं, आधुनिक तकनीक के उपयोग तथा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं।उधर, संसद में भी पेपर लीक का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। विपक्ष की प्रमुख मांगों में धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करना, प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों से माफी मांगना तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।इस बीच, पिछले 25 दिनों से अनशन पर बैठे लद्दाख के शिक्षाविद एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नरम रुख अपनाते हुए कहा कि यदि आंदोलन में शामिल युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो वह प्रदर्शनकारियों से फिलहाल आंदोलन स्थगित कर सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि संवाद के जरिए समाधान निकालना आवश्यक है।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस आरोप को खारिज किया कि विपक्ष पेपर लीक पर चर्चा से बच रहा है। खरगे ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में चर्चा चाहती तो विपक्ष की पहली मांग पर ही संसद में बहस शुरू कर देती। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज कराया गया और उनकी आवाज दबाने का प्रयास हुआ।खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी सरकार की है और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक न्याय नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं का जवाब देना चाहिए।पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छिड़ा यह विवाद अब सड़क से लेकर संसद तक राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है। एक ओर सरकार बातचीत और सुधारों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन और विपक्ष अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ऐसे में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में वार्ता का रास्ता निकलता है या टकराव और बढ़ता है। संसद भवन परिसर में गुरुवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ,कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी तथा समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन में भाग लिया। नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर सरकार को घेरा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। विपक्षी नेताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह होना चाहिए और छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

