बाजपुर चीनी मिल के स्क्रैप में करोड़ों का महाघोटाला!
63 कुंतल से 222.40 कुंतल तक का खेल! 65 गाड़ियां पहले ही निकल चुकीं, कांग्रेस और किसानों का बेमियादी धरना शुरू
बाजपुर। बाजपुर सरकारी चीनी मिल में स्क्रैप बिक्री के नाम पर बड़े पैमाने पर हुए कथित भ्रष्टाचार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक ट्रक की तौल में सामने आए भारी अंतर ने पूरे स्क्रैप बिक्री सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि चीनी मिल के धर्मकांटे पर जिस ट्रक का वजन केवल 63 कुंतल दर्ज किया गया, वही ट्रक जब बाहर किसान कांटे पर तौला गया तो उसका वजन 222-40 कुंतल निकला। एक ही वाहन की तौल में करीब 160 कुंतल का अंतर मिलने से सरकारी संपत्ति की कथित लूट का मामला उजागर हो गया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कोई एक दिन की गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से लंबे समय से चल रहा खेल है। उनके अनुसार अब तक स्क्रैप से भरे करीब 65 ट्रक चीनी मिल से बाहर जा चुके हैं। यदि प्रत्येक वाहन में इसी तरह कम तौल दिखाकर स्क्रैप निकाला गया है तो सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा हो सकता है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक नुकसान का आकलन करना बेहद जरूरी हो गया है। मामला 21 जुलाई को उस समय सामने आया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्क्रैप लेकर जा रहे एक ट्रक को रोककर दोबारा तौल कराया। दोनों कांटों की तौल में भारी अंतर मिलने के बाद कांग्रेस ने इसे सरकारी संपत्ति की खुली लूट बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद किसानों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चीनी मिल के मुख्य गेट पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर स्क्रैप बाहर जाने के बावजूद अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है। इसलिए केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों, ठेकेदार और सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर चीनी मिल की प्रभारी जीएम एवं एसडीएम डॉ- अमृता शर्मा ने प्रभारी भंडारपाल अविनेश कुमार शर्मा और प्रभारी गोदाम कीपर स्नेह विकास शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रथम दृष्टया वाहनों की तौल में अनियमितता और कार्य में लापरवाही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है। साथ ही स्क्रैप उठान पर रोक लगाकर जांच शुरू कर दी गई है। धरने के दौरान किसान नेताओं और कांग्रेस पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक ट्रक का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति को व्यवस्थित तरीके से ठिकाने लगाने का गंभीर मामला है, जिसकी तह तक पहुंचना जरूरी है।
