रुद्रपुर में ‘भाजपा की गुटबाजी’ खुलकर आई सामने: विकास कार्यों का श्रेय लेने की मची होड़
प्रभारी मंत्री हैरान, मंच से जमकर एक दूसरे पर कसे गए तंज
रुद्रपुर। मंगलवार को रूद्रपुर पहुंचे उत्तराखंड के कैबिनेट व प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा के सामने भाजपा के अंदरूनी कलह और विकास कार्यों का श्रेय लेने की राजनीति खुलकर सामने आ गई है। मेयर विकास शर्मा और स्थानीय विधायक शिव अरोरा के समर्थकों द्वारा की गयी नारेबाजी ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। यह राजनीतिक ड्रामा आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में रुद्रपुर और पूरे ऊधम सिंह नगर जिले में भाजपा के भविष्य को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करता है। प्रभारी मंत्री के स्वागत के बहाने दोनों नेताओं ने अपना अपना शक्ति प्रदर्शन किया। सरकार में नवनियुक्त कैबिनेट व जिला प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा जब विकास कार्यों और विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए रुद्रपुर पहुंचे, तो संगठन में सब कुछ सामान्य नहीं दिखा। मंत्री के स्वागत के दौरान ही मेयर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोरा के समर्थक आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने अपने-अपने नेताओं के पक्ष में जमकर नारेबाजी की।हालांकि मंच पर नेताओं ने एक-दूसरे का स्वागत किया, लेकिन जमीन पर कार्यकर्ताओं घमासान साफ तौर पर यह संदेश दे रहा था कि पार्टी के दो बड़े स्तंभों के बीच अंदरूनी तालमेल की भारी कमी है। रुद्रपुर नगर और आस-पास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय में हुए विकास कार्यों को अपनी- अपनी उपलब्धि बताने को लेकर दोनों खेमों में लंबे समय से शीतयुद्ध चल रहा था, जो 14 जुलाई को सार्वजनिक हो गया। नगर निगम के माध्यम से हो रहे विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे की मजबूती, और शहरी सौंदर्यीकरण को लेकर मेयर खेमा आक्रामक है। उनका मानना है कि स्थानीय निकाय की सक्रियता के कारण ही धरातल पर काम दिख रहे हैं और ऐसा माना जाता है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी उनको आशीर्वाद प्राप्त है।

दूसरी ओर, विधायक शिव अरोरा के समर्थक राज्य सरकार और विधानसभा स्तर से मिलने वाले भारी-भरकम फंड तथा बड़े प्रोजेक्ट्स का श्रेय अपने विधायक को दे रहे हैं। उनका तर्क है कि बिना विधायक की पैरवी के बड़ी योजनाएं रुद्रपुर में लाना मुमकिन नहीं था। प्रभारी मंत्री के सामने ही दोनों पक्षों के नेताओं ने परोक्ष और अपरोक्ष रूप से एक-दूसरे पर विकास कार्यों की अनदेखी करने या दूसरे के कामों पर अपना बोर्ड लगाने के आरोप मढ़े। दोनों ही नेताओं ने मंच से अपने संबोधन में एक दूसरे पर इशारे इशारों में तंज कसा जो कि सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा के लिए ऊधम सिंह नगर की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह पहली बड़ी आंतरिक संगठनात्मक चुनौती है। हालांकि प्रभारी मंत्री ने स्थिति को संभालते हुए दोनों ही गुटों को एकजुट होकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्य किसी व्यक्ति विशेष के नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीतियों की देन हैं। बत्रा ने मंच से 2027 के विधानसभा चुनावों में जीत का भरोसा तो जताया, लेकिन उनके सामने अब रुद्रपुर भाजपा के भीतर पनप रही इस गुटबाजी को शांत करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।यह विवाद महज एक दिन की नारेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय है।कार्यकर्ताओं का दो धड़ों ;मेयर बनाम विधायकद्ध में बंटना चुनाव में भितरघात का कारण बन सकता है।यदि समय रहते संगठन ने दोनों नेताओं के बीच समन्वय बना लिया, तो यह आपसी प्रतिस्पर्धा जमीन पर दोगुनी मजबूती दे सकती है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भाजपा की इस कलह को ‘विकास कम, कुर्सी की लड़ाई ज्यादा’ कहकर भुनाने की कोशिश करेंगे।विपक्ष फिलहाल जिले में बिखरा हुआ है, जिससे भाजपा को अपनी गलतियों को सुधारने का पर्याप्त समय मिल जाता है।जनता के बीच यह संदेश जा सकता है कि जनहित के मुद्दों से ज्यादा नेताओं को अपनी साख और श्रेय की चिंता है।केंद्र व राज्य सरकार की योजनाएं नजूल भूमि का मुद्दा, रुद्रपुर का सौंदर्यीकरण सीधे जनता से जुड़ी हैं, जिससे एंटी-इन्कंबेंसी कम हो सकती है।14 जुलाई की यह घटना रुद्रपुर भाजपा के लिए एक चेतावनी की तरह है। यदि संगठन और प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा ने समय रहते विधायक शिव अरोरा और मेयर विकास शर्मा के बीच के इस गतिरोध को दूर नहीं किया, तो पार्टी के भीतर का यह असंतोष 2027 के चुनावी गणित को बिगाड़ सकता है। रुद्रपुर में भाजपा का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी दिनों में विकास कार्यों का ‘श्रेय’ लेने की होड़ थमती है या यह गुटबाजी और गहरी होती है।
