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विभाजन का दर्द झेल चुके पंजाबी समाज में फिर बढ़ी पीड़ा

स्मृति स्तंभ निर्माण को लेकर व्यापारियों में रोष,बोले विभाजन विभीषिका की पीड़ा को ताजा कर रहे हैं कुछ जनप्रतिनिधि
किच्छा। देश के विभाजन की त्रासदी झेल चुके पंजाबी समाज के लोगों का कहना है कि जिन परिवारों ने अपना घर-बार, कारोबार और अपनों को खोने का दर्द सहा, आज उन्हीं की स्मृति में बनने वाले प्रस्तावित स्मृति स्तंभ को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पंजाबी समाज से जुड़े व्यापारियों का आरोप है कि उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने स्मृति स्तंभ निर्माण की योजना से उन्हें आर्थिक नुकसान और असुरक्षा का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि अपने पूर्वजों और विभाजन के पीड़ितों के सम्मान के नाम पर यदि वर्तमान पीढ़ी के व्यापार और आजीविका पर संकट खड़ा होता है तो इससे समाज में सम्मान की बजाय रोष और असंतोष की भावना पैदा होना स्वाभाविक है। किच्छा शहर में प्रस्तावित विभाजन विभीषिका स्मृति स्तंभ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां इसे विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लाखों लोगों की स्मृति से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारी इसके लिए चयनित स्थान पर सवाल उठा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें स्मृति स्तंभ के निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिस स्थान का चयन किया गया है, उससे उनके व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं। व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें अतिक्रमण की कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। उनका कहना है कि शहर में वर्षों पहले अतिक्रमण का सर्वे और चिन्हांकन किया गया था, लेकिन लंबे समय तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अब अचानक इस मुद्दे को सामने लाए जाने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि वर्ष 2014 से 2017 के दौरान तैयार की गई अतिक्रमण रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई शुरू होती है तो इसका प्रभाव केवल कुछ दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर के अनेक हिस्से इसकी जद में आ सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अतिक्रमण की स्थिति वर्षों से बनी हुई थी तो संबंधित विभाग और अधिकारी अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन को पूरे शहर के लिए एक समान नीति अपनानी चाहिए। उनका तर्क है कि किसी एक क्षेत्र या विशेष वर्ग के लोगों को ही कार्रवाई का संदेश जाना उचित नहीं माना जा सकता। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। चर्चा है कि पंजाबी समाज लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यदि समाज के भीतर असंतोष बढ़ता है तो इसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। स्मृति स्तंभ का निर्माण शहर के किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भी किया जा सकता है, जिससे सम्मान और स्मरण का उद्देश्य भी पूरा हो तथा किसी व्यापारी या नागरिक के हित प्रभावित न हों। इस पूरे विवाद के बीच पंजाबी समाज के विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। कई व्यापारी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं, जबकि कुछ सामाजिक संगठनों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और आशंकाओं से कई जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया है तथा उम्मीद जताई है कि मामले का समाधान आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से निकाला जाएगा। फिलहाल स्मृति स्तंभ को लेकर शुरू हुआ यह विवाद किच्छा की राजनीति और सामाजिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के जिम्मेदार लोग इस मामले का ऐसा समाधान निकाल पाते हैं या नहीं, जिससे विभाजन की पीड़ा की स्मृति का सम्मान भी बना रहे और स्थानीय व्यापारियों की चिंताओं का भी उचित समाधान हो सके।

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