भारतीय सेना को मिले 481 युवा अफसर : पहली बार नौ महिला कैडेट भी बनीं सैन्य अधिकारी
देहरादून (उद संवाददाता)। आईएमए से कुल 515 जेंटलमैन कैडेट पास आउट हुए, जिनमें से 481 युवा भारतीय सेना में अधिकारी बने, जबकि 16 मित्र देशों के 34 कैडेट भी प्रशिक्षण पूरा कर अपने देशों की सेनाओं में शामिल होने के लिए रवाना हुए। इस बार की परेड इसलिए भी ऐतिहासिक रही क्योंकि पहली बार आईएमए से नौ महिला कैडेट भी प्रशिक्षण पूरा कर सैन्य अधिकारी बनीं। शनिवार सुबह चौटवुड ग्राउंड में सैन्य परंपराओं के अनुरूप पासिंग आउट परेड का शुभारंभ हुआ। सबसे पहले कंपनी सार्जेंट मेजर चौटवुड भवन परिसर में पहुंचे, जिसके बाद विभिन्न कंपनियों के कैडेट परेड मैदान में अपनी निर्धारित टुकड़ियों में पहुंचे। भारतीय सैन्य अकादमी का ध्वज परेड स्थल पर लाया गया और सैन्य परंपरा के अनुसार उसे सम्मान दिया गया। इसके बाद वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का औपचारिक स्वागत किया गया। परेड में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पहुंचने से पहले मेजर जनरल सचिन मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह तथा लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा का परेड द्वारा स्वागत किया गया। सुबह लगभग सवा सात बजे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी परेड स्थल पहुंचे। इसके बाद सुबह साढ़े सात बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष घोड़ा बग्गी श्पटियाला कोचश् से परेड मैदान पहुंचीं और उन्होंने परेड की सलामी लेते हुए टुकड़ियों का निरीक्षण किया। परेड निरीक्षण के बाद कदमताल शुरू हुई और कैडेटों ने शानदार मार्च पास्ट कर अनुशासन, सैन्य दक्षता और प्रशिक्षण का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति ने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित भी किया। इस वर्ष अकादमी के कैडेट विशाल कुमार सर्वश्रेष्ठ रहे। उन्हें सर्वश्रेष्ठ जेंटलमैन कैडेट चुने जाने पर प्रतिष्ठित स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। साथ ही नियमित पाठड्ढक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया। प्रिंस राज को नियमित पाठड्ढक्रम में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर सिल्वर मेडल तथा तेजस भट्टð को तीसरा स्थान प्राप्त करने पर ब्रॉन्ज मेडल दिया गया। टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हृषभ मिश्रा को टीजीसी सिल्वर मेडल प्रदान किया गया। टेक्निकल एंट्री स्कीम में करण पांडेय को सिल्वर मेडल मिला, जबकि स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स में बोधराज थापा को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। मित्र देशों के कैडेटों में बांग्लादेश के कैडेट जैफ सादिद अल्वी को सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट का पुरस्कार मिला। वहीं चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर इंफाल कंपनी को प्रदान किया गया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पास आउट होने वाले कैडेट्स को भारत माता की रक्षा के लिए कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी केवल देश की सीमाओं के प्रहरी ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास, सम्मान और आकांक्षाओं के भी संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की पासिंग आउट परेड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता 9 महिला कैडेटों का सफलतापूर्वक पास आउट होना रहा। भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा सशक्त भारत की अवधारणा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और तकनीकी प्रगति के इस दौर में भारतीय सेना को निरंतर नवाचार, आधुनिकता और अनुकूलनशीलता के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करने, उच्च नैतिक मूल्यों का पालन करने तथा सैनिकों के कल्याण और सैन्य प्रभावशीलता के बीच संतुलन स्थापित करने का आ“वान किया। परेड के समापन पर सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब कैडेटों ने आईएमए की ऐतिहासिक ‘अंतिम पग’ परंपरा पूरी करते हुए चौटवुड भवन के सामने अंतिम कदम रखा। सैन्य परंपरा के अनुसार अकादमी का अंतिम पग पार करते ही सभी कैडेट भारतीय सेना के अधिकारी बन गए। इस गौरवपूर्ण क्षण पर हेलीकॉप्टर से नव नियुक्त अधिकारियों पर पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति और उल्लास से गूंज उठा। इसके बाद पीपिंग सेरेमनी आयोजित हुई, जिसमें परिजनों ने अधिकारियों के कंधों पर सितारे सजाकर उनके सैन्य जीवन की नई शुरुआत का साक्षी बनने का गौरव प्राप्त किया।
