राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को नवाचार, शोध और जीवन मूल्यों का दिया संदेश
ज्ञान, विज्ञान और संस्कार का संगम बना ‘ज्ञान दीक्षा’ कार्यक्रम
पंतनगर । गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, नवाचार और जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फ्ज्ञान दीक्षा 2026य् कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, प्रख्यात चिंतक और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी तथा कुलपति प्रो. शिवेंद्र कुमार कश्यप ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और जीवन मूल्यों को विकसित करने वाली सशक्त पाठशाला है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन के चार वर्ष किसी भी विद्यार्थी के जीवन के स्वर्णिम दिवस होते हैं, जिनकी स्मृतियां जीवनभर प्रेरणा और ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि आज का दौर केवल सूचना प्राप्त करने का नहीं, बल्कि ज्ञान को व्यवहार में उतारने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का है। ज्ञान व्यक्ति को जानकारी देता है, जबकि दीक्षा जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करती है। इसके लिए गुरु और सही मार्गदर्शन आवश्यक होता है। विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जो सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करे। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय की संस्कृति, अनुशासन और शैक्षणिक परंपरा देशभर में अलग पहचान रखती है। यहां विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन के वास्तविक अनुभव, टीम भावना, संघर्ष क्षमता और नेतृत्व के गुण भी सिखाए जाते हैं। उन्होंने अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए कहा कि पंतनगर में बिताए गए क्षण आज भी उनके जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने विज्ञान, तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग, कॉस्मिक एनर्जी, चेतना और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में युवाओं को वैज्ञानिक सोच, शोध की भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना होगा। विद्यार्थियों को शोध, पेटेंट, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान और दर्शन एक दूसरे के पूरक हैं। मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मविकास, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना भी है। व्यक्ति को अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के सकारात्मक उपयोग पर भी जोर दिया। विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, आत्मविश्वास और आत्ममूल्यांकन को जीवन का आधार बनाने की अपील करते हुए कहा कि ज्ञान और विवेक का संतुलन ही व्यक्ति को सफल और श्रेष्ठ बनाता है। विज्ञान और कला का समन्वय समाज को नई दिशा दे सकता है। सुधांशु त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और निरंतर सीखते रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि विचारों और व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र होता है। इस अवसर पर कुलपति प्रो. एस. के. कश्यप ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। फ्ज्ञान दीक्षा 2026य् जैसी पहल विद्यार्थियों को नई सोच, प्रेरणा और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करेगी। कार्यक्रम में कार्यवाहक कुलसचिव डॉ. आर. एस. जादौन ने अतिथियों का स्वागत किया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. विपिन ध्यानी ने मुख्य अतिथि सहित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक साबित होगा। कार्यक्रम का संचालन सह अधिष्ठात्री छात्र कल्याण डॉ. छाया शुक्ला ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की नियंत्रक, निदेशक प्रशासन एवं अनुश्रवण, विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशकगण, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा सभी डिग्री प्रोग्राम के अंतिम वर्ष के छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
