पत्रकार हेम भट्ट प्रकरण पर गरमाई राजनीति, अरविंद पांडेय का लिया था इंटरव्यू : कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
घर से उठाए जाने मारपीट किए जाने के आरोपों से राजनीतिक और मीडिया जगत में आक्रोश
देहरादून। पत्रकारों की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उत्तराखंड में आए दिन मीडिया कर्मियों पर हो रहे राजनीतिक प्रहार से लोकतांत्रिक व्यवस्था धूमिल हो रही है। राजनीति से जुड़े मामलों पर मीडिया कर्मियों की निष्पक्षता के प्रति कुछ लोगों की हीन भावना चरम पर है। सत्ता पक्ष के प्रति सवाल उठाने वाले मीडिया कर्मी राजनीतिक वर्चस्व रखने वाले लोगों की गुंडागर्दी का शिकार हो रहे है। एक मामला सोशल मीडिया में सुर्खियों में छाया हुआ हैं। बताया जा रहा है कि एक पत्रकार को सत्ता प़क्ष के एक कद्दावर विधायक का इंटरव्य लेना भारी पढ़ गया । जय भारत टीवी के पत्रकार हेम भट्ट को कथित रूप से सुबह पुलिस द्वारा घर से उठाए जाने और मारपीट किए जाने के आरोपों ने राजनीतिक और मीडिया जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि पत्रकार हेम भट्ट ने पूर्व शिक्षा मंत्री एवं गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय का इंटरव्यू लिया था, जिसके प्रसारण के बाद यह विवाद सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पुलिस सुबह करीब 4 बजे हेम भट्ट को उनके घर से उठाकर ले गई। इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मामले को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर पुलिस द्वारा मीडिया कर्मियों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि किसी पत्रकार को केवल इंटरव्यू लेने या सत्ता पक्ष से सवाल पूछने के कारण कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने सरकार से पत्रकार हेम भट्ट को तुरंत रिहा करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं कुछ लोगों ने पत्रकार संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस और सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लोकतंत्र में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। ऐसे में यदि किसी पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार या दबाव की घटना सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जनता का विश्वास कायम रह सके।
पत्रकार को छोड़ा जाये और उनका उत्पीड़न बंद करे :अरविंद पांडे
विधायक अरविंद पांडे ने भी पत्रकार हेम भट्ट का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका इंटरव्यू लेने के बाद पुलिस ने जबरन उनके घर में घुसकर उनकी पत्नी और परिजनों के समक्ष मारपीट कर उठाया गया है। उनका दोष सिर्फ इतना है कि पत्रकार ने उनका इंटरव्यू लिया। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि पत्रकार को छोड़ा जाये और उनका उत्पीड़न बंद करे। पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। उनकी जानकारी में आया है कि उत्तराखण्ड में जय भारत टीवी चैनल के सम्मानित पत्रकार हेम भट्ट जी को तत्काल उनके परिवारजनों तक पहुंचाया जाए ऐसा पुलिस प्रशासन से कहना चाहता हूँ।
