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हीट वेव का अलर्ट : विद्यालयों को केवल प्रातः 7 बजे से 11ः30 बजे तक संचालित करने के निर्देश

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जनपद में भीषण गर्मी और हीट वेव को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों के संचालन समय में बदलाव के स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले के अधिकांश निजी एवं कुछ अन्य विद्यालय प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। तय समय के बाद भी स्कूल खुले रहने से बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष नितिन सिंह भदौरिया द्वारा जारी आदेश में भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून की 18 मई 2026 की चेतावनी का हवाला देते हुए कहा गया है कि उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी एवं हीट वेव चलने की संभावना है। लगातार बढ़ते तापमान के चलते डिहाइड्रेशन समेत कई स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो सकते हैं, जिसका सबसे अधिक असर छोटे बच्चों, छात्र- छात्राओं, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं पर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने 20 मई 2026 से आगामी एक सप्ताह तक जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, प्री-नर्सरी से कक्षा 12 तक संचालित सभी सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों को केवल प्रातः 7 बजे से 11ः30 बजे तक संचालित करने के निर्देश दिए थे। आदेश में स्पष्ट चेतावनी भी दी गई थी कि निर्देशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद जिले के कई विद्यालय निर्धारित समय के बाद भी संचालित होते देखे गए। छुट्टी होने के बाद विद्यार्थी तेज धूप में पैदल अपने घर जाते दिखाई दिये। जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। अभिभावकों का कहना है कि दोपहर की तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच बच्चों को स्कूल में रोके रखना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। छोटे बच्चों को चक्कर आना, उल्टी, सिरदर्द और थकावट जैसी समस्याएं होने लगी हैं, लेकिन कुछ स्कूल प्रबंधन प्रशासनिक आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है जो आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आदेश जारी किया है तो उसका पालन सुनिश्चित कराना भी जरूरी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन आदेशों की अनदेखी करने वाले विद्यालयों पर क्या कार्रवाई करता है या फिर सरकारी निर्देश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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