मस्जिदों में लगने लगे पोस्टर, एसआईआर के लिए दस्तावेज तैयार रखें
देहरादून। उत्तराखंड में एसआईआर यानि मतदाता सूची में पुनर्निरीक्षण का काम अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है। खास बात ये कि उत्तराखंड की कई मस्जिदों में ऐसे पोस्टर या सूचनाएं चिपके हुए देखे जा सकते है जिनमें लोगों से चालीस साल पुराने दस्तावेज निकाल कर रखने को कहा जा रहा है। उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज की खबरों के बीच एसआईआर को लेकर भी ये चर्चा है कि यहां लाखों की संख्या में वोटरलिस्ट में जो नाम है वो मौके पर नहीं मिल रहे है। इनमें ज्यादातर वो लोग बताए जा रहे है जोकि दूसरे राज्यों से यहां आए और उनके नाम यहां की मतदाता सूची में दर्ज हुए पिछले दिनों बिहार बंगाल असम में चुनाव हुए तो बहुत से बड़ी संख्या में लोगों ने वहां की मतदाता सूची में दर्ज नाम के आधार पर मतदान किया। ऐसे बहुत से नाम सामने आए जोकि कई राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज हुए थे। बाहरी लोगों ने अपने मूल राज्य में मिलने वाली सुविधाओं, स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के आधार पर वहां जाकर वोट डाले। अब एसआईआरउत्तराखंड में भी होना है जिसके लिए शासन प्रशासन में तैयारियां तो चल ही रही है, राजनीतिक दल भी अपनी तैयारी कर रहे है। उत्तराखंड में कुल 11733 पोलिंग बूथ है, संभवतः 811 नए पोलिंग बूथ भी बनाए जाने है जिनकी मतदाता सूची पर एसआईआर होना है। इनमें से 88 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, शेष 12 प्रतिशत वोटर्स पर काम चल रहा है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने अपना मुस्लिम वोट बैंक को पुख्ता करने के लिए,मुस्लिम नेताओं को लगाया है साथ ही जमीयत उलेमा ए हिंद के वर्कर्स भी मस्जिदों के जरिये वोटर संबंधी दस्तावेज पूरे करने के लिए तैयारी कर चुके है। कांग्रेस ने अभी तक लगभग सभी बूथों के लिए अपने बीएलओ सूचीब( कर लिये है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य के सभी पुलिस बूथ के लिए जो बीएलओ बनाए है उनको प्रशिक्षण देने का काम पूरा कर लिया है।ये बीएलओ अपने अपने क्षेत्रों में गायब मतदाता और नए मतदाताओं की समीक्षा करेंगे। यूपी से लगे जिलों में कई लाख मतदाता प्री मैपिंग में नहीं मिल पा रहे है। राजधानी देहरादून और जिले की बात की जाए तो राज्य बनने के वक्त यहां जिले में 75 मलिन बस्तियां थी जिनमे नाम मात्र की आबादी थी, लेकिन 2004 में इनकी संख्या बढ़ कर 102 और 2008 में 129 हो गई । 2016 में ये संख्या 150 तक जा पहुंची और अब ये संख्या 200 के करीब पहुंच गई है।देहरादून के बीच बहने वाली रिस्पना बिंदाल और अन्य बरसाती नदियों के दोनो तरफ कई किमी तक नदी श्रेणी फ्रलड जोन की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे है और यहां बसे और बसाए गये लोगों ने नाम वोटर सूची में दर्ज किए हुए थे। एक देश एक चुनाव एक वोटर लिस्ट: ऐसी सामाजिक चर्चा है कि भविष्य में भारत सरकार एक देश एक चुनाव और एक वोटरलिस्ट की संकल्प पर आगे बढ़ सकती है। यानि देश में कहीं भी जब भी कोई चुनाव हो चाहे लोकसभा चाहे विधान सभा चाहे स्थानीय निकाय वहां भविष्य में एक ही सूची बनाई जाएगी ताकि इस पर होने वाला खर्चा और समय दोनों बच सके। डिजिटल युग में ऐसा संभव भी है और इससे चुनाव प्रक्रिया भी पारदर्शी होगी। इन्हीं कुछ कारणों मतदाताओं में ऐसी चर्चा गहराई हुई है कि वे अपने मूल स्थान की मतदाता सूची में ही अपने नाम दर्ज कराए। ऐसा भी कहा जा रहा है दूसरे देशों की तरह भारत में भी आने वाले समय में चुनाव सुधारों के तहत ऑनलाइन वोटिंग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ऐसे में मतदाताओं में इस बार एसआईआर को लेकर गंभीरता है।
