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“डैमेज कंट्रोल” में जुटी कांग्रेस: खींचतान के बीच यशपाल आर्य और हरीश रावत की मुकालात से हलचल तेज

देहरादून। देहरादून में यशपाल आर्य और हरीश रावत की मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान और बयानबाजी के बीच इस मुलाकात को “डैमेज कंट्रोल” के तौर पर देखा जा रहा है।बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने देहरादून स्थित पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के आवास पहुंचकर उनसे शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन को मजबूत करने, आगामी चुनावी रणनीतियों और जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर पार्टी को मजबूत बनाने का संदेश भी दिया। दरअसल, हाल के दिनों में उत्तराखंड कांग्रेस में गुटबाजी और असंतोष खुलकर सामने आया है। पार्टी ने भाजपा को टक्कर देने के लिए कुछ पूर्व नेताओं और विधायकों को शामिल किया, लेकिन कुछ नामों को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। इसी बीच हरीश रावत ने एक नेता को शामिल न किए जाने पर नाराजगी जताई और युवा नेताओं की उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए 15 दिन के राजनीतिक अवकाश की घोषणा कर दी, जिससे पार्टी में हलचल तेज हो गई। रावत के इस कदम के बाद कांग्रेस के भीतर बयानबाजी भी बढ़ी, जिस पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने नेताओं को अनुशासन में रहने और अपनी बात पार्टी मंच पर रखने की सलाह दी। अब यशपाल आर्य और हरीश रावत की मुलाकात को पार्टी के भीतर एकजुटता लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा के खिलाफ मजबूत मुकाबले के लिए कांग्रेस को अनुभवी नेताओं, खासकर हरीश रावत जैसे कद्दावर चेहरे की जरूरत बनी रहेगी। उत्तराखंड कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आज पूर्व सीएम हरीश रावत के आवास पहुंचकर उनसे भेंट की साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी चर्चा की। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं ने मुलाकात की तस्वीरे साझा करते हुए कांग्रेस की मजबती के लिए जुटने का आहवान किया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय हरीश रावत जी से उनके देहरादून स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की मजबूती, आगामी रणनीतियों एवं जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक एवं विस्तृत चर्चा हुई। पिछले दिनों कांग्रेस ने भाजपा को टक्कर देने के लिए पूर्व में भाजपा से निष्कासित नेताओं और पूर्व विधायकों की पार्टी में ज्वाईनिंग करायी थी। पार्टी में कुल सात नेताओं की ज्वाइनिंग हुई लेकिन कुछ नेताओं के नाम को लेकर माथापच्ची चल रही थी। इसी बीच पूर्व सीएम हरीश रावत ने एक कद्दावर नेता को पार्टी में शामिल नहीं कराने पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी में युवा नेताओं की उपेक्षा का हवाला देते हुए राजनीतिक अवकाश लेने का ऐलान कर पार्टी में खलबली मचा दी। हांलाकि हरदा ने इसे सिर्फ 15 दिन का अवकाश बताकर विरोधियों का साधने का प्रयास किया। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता हरदा के संकेतों को लेकर हमलावर हो गये । कांग्रेस में नेताओं की बयानबाजी को थामने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सभी को अपनी बात पार्टी फोरम में रखने की नसीहत दी है। वहीं अब नेता प्रतिपक्ष की पूर्व सीएम हरीश रावत से हुई इस मुलाकात के नये सियासी मायने भी निकाले जा रहे है। कुछ नेता पूर्व सीएम को पार्टी की जिम्मेदारी से बाहर होने का दावा कर रहे हैं लेकिन राजनीतिक पंडितों की माने तो प्रदेश में लगातार सत्ता पर काबिज हो रही भाजपा से मुकाबले के लिए कांग्रेस को पूर्व सीएम हरीश रावत जैसे अनुभवी नेता की हमेशा जरूरत रहेगी।

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