सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
काशीपुर। किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में पुलिस मुख्यालय स्तर से गठित विशेष जांच दल ;एसआईटीद्ध ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 12 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट काशीपुर की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस मामले में आईटीआई कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी को भी आरोपी बनाया गया है। एसआईटी की इस कार्रवाई को मामले में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति माना जा रहा है। बता दें कि ग्राम पैगा निवासी किसान सुखवंत सिंह ने कथित भूमि धोखाधड़ी और पुलिस की कार्यप्रणाली से आहत होकर 10 जनवरी की रात हल्द्वानी के गौलापार स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था, जबकि होटल के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। वीडियो और सुसाइड नोट में सुखवंत सिंह ने ऊधमसिंह नगर जिले के कई पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों का नाम लेते हुए अपनी मौत के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया था। घटना के बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आया था। प्रारंभिक तौर पर आईटीआई कोतवाली में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था, हालांकि उस समय दर्ज मुकदमे में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। मामला बढ़ने और जनदबाव बनने के बाद शासन स्तर पर एसआईटी का गठन किया गया। इसके बाद एसआईटी ने पुलिस अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की। पुलिस सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने करीब 79 दिन की विस्तृत विवेचना के बाद 12 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 28 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। जांच के दौरान 56 लोगों को गवाह बनाया गया। एसआईटी ने अपनी विवेचना में डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया। जांच के दौरान मृतक सुखवंत सिंह के मोबाइल फोन की जांच कराई गई, फेसबुक पर वायरल हुए वीडियो का फॉरेंसिक परीक्षण कराया गया और सुखवंत सिंह की ओर से भेजे गए विभिन्न ई-मेल की भी वैज्ञानिक जांच की गई। इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों को चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है। एसआईटी की चार्जशीट में आईटीआई कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी कुंदन सिंह रौतेला के खिलाफ सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने और धमकाने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं विमल कुमार, आशीष चौहान उर्फ पटवारी, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, अमरजीत सिंह, जगपाल सिंह, गुरप्रेम सिंह और जहीर के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने, धोखाधड़ी और धमकाने के साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है। इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108, 318;4, 352;2 और 351;2 के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा बलवंत सिंह उर्फ काले, जगवीर सिंह उर्फ जगवीर राय, मनप्रीत सिंह और सुखवंत सिंह पन्नू के खिलाफ धमकाने के आरोप में धारा 352 और 351;2 के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच के दौरान देवेन्द्र, बिजेन्द्र और सत्येंद्र नाम के आरोपियों के संबंध में एसआईटी को कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। वहीं कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ विवेचना अभी भी जारी बताई जा रही है। इससे साफ है कि यह मामला अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और नाम भी सामने आ सकते हैं। इस चर्चित घटना के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, एएसआई सोमवीर सिंह, कांस्टेबल दिनेश तिवारी, भूपेंद्र सिंह, शेखर बनकोटी, सुरेश चंद्र, योगेश चौधरी, राजेंद्र गिरी, दीपक प्रसाद और संजय कुमार को लाइन हाजिर किया गया था। इससे यह भी संकेत मिला था कि मामले को शासन और पुलिस मुख्यालय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण में एसआईटी द्वारा अदालत में चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद निगाहें न्यायिक प्रक्रिया पर टिक गई हैं। सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने न केवल कथित भूमि धोखाधड़ी के मामलों को फिर से चर्चा में ला दिया है, बल्कि पुलिस की भूमिका और कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
