February 11, 2026

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भारत माता मंदिर राष्ट्रभक्ति का जीवंत केंद्रः धामी

भारत माता मंदिर में आयोजित धर्मसभा एवं संत सम्मेलन में जुटे देश भर के दिग्गज संत और राजनेता
हरिद्वार (उद संवाददाता)। भारत माता मंदिर के संस्थापक, महान मनीषी और समन्वय सेवा ट्रस्ट के प्रणेता ब्रह्मलीन स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज की समाधि स्थली पर आयोजित ‘श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह’ के दूसरे दिन धर्म और राजनीति की महान विभूतियों का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया।द्वितीय दिवस के अवसर पर आयोजित ‘धर्मसभा एवं संत सम्मेलन’ में देश के कोने-कोने से आए प्रख्यात संत-महात्माओं, धर्माचार्यों और विद्वानों ने स्वामी सत्यामित्रनंद गिरि महाराज के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी जी ने न केवल सनातन धर्म की समन्वय परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया, बल्कि ‘भारत माता मंदिर’ के माध्यम से राष्ट्रवाद और आध्यात्मिकता के अनूठे मेल को जीवंत किया। वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका पर अपने गंभीर विचार साझा किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ब्रह्मलीन स्वामी जी को नमन करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और राष्ट्र की एकता के लिए समर्पित था। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने समन्वय का जो मार्ग दिखाया, वह आज के समय में समाज को एकजुट रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उत्तराखंड सरकार उनके दिखाए मार्ग पर चलकर राज्य की आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखने के लिए संकल्पबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत माता मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का एक जीवंत केंद्र है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने सभी आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यामित्रनंद जी एक ऐसी चेतना थे जिन्होंने सनातन की उदारता को हर हृदय तक पहुँचाया। इस अवसर पर जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, योग गुरू स्वामी रामदेव, प्रमोद कृष्णन आदि समेत तमाम संत और राजनेता मौजूद रहे।

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