26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मिली मान्यता
देहरादून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईआरडीटी सभागार में आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण पत्र वितरण समारोह में प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय ज्ञान विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है, इसलिए बच्चों को बदलती दुनिया के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान किया जाना इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत है। राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार कर रही है और इसका उद्देश्य सभी बच्चों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़कर उन्हें आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा के साथ नई तकनीक और शोध को समझने का अवसर मिलना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक, वैज्ञानिक अथवा अन्य क्षेत्रों में अपना भविष्य बना सकते हैं। कृषि से जुड़े बच्चों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी वर्ग को लक्षित करने के लिए लागू नहीं की गई है। इसी प्रकार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्देश्य भी सभी वर्गों के बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की परंपरा रही है तथा सरकार किसी व्यक्ति के साथ उसकी पहचान या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करती। मुख्यमंत्री ने सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना सरकार का उद्देश्य नहीं है और जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र हैं, उन्हें परेशान करने का कोई कारण नहीं है।उन्होंने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को हुनर और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। युवाओं को ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की उपाध्यक्ष फरजाना और अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि काम करने और अपनी क्षमता साबित करने वाले लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि समाज को शिक्षा और विकास के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज के कुछ वर्गों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले, लेकिन अब इस सोच को बदलने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है। राशन, स्वास्थ्य सुविधाएं, पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य उपचार की सुविधा और गैस कनेक्शन जैसी योजनाओं का लाभ पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी सभी बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई नई व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी सरकार और शिक्षण संस्थानों दोनों की है। इसके लिए आपसी सहयोग और विश्वास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा बच्चों के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और समय के साथ शिक्षा तथा कार्य करने के तरीकों में बदलाव भी जरूरी है। उन्होंने अपने किसान परिवार से होने का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीक ने खेती को आसान और प्रभावी बनाया है। समारोह में देहरादून जनपद के छह, हरिद्वार जनपद के 19 तथा ऊधमसिंहनगर जनपद के एक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। ऊधमसिंहनगर के केलाखेड़ा स्थित एम. जी. एन. पब्लिक स्कूल को भी नवीन मान्यता प्रदान की गई। इस प्रकार प्रदेश के कुल 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिली। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
