सीएम धामी को 25 विधानसभा सीटों से मिला चुनाव लड़ने का न्योता! विधायकों को सक्रिय होकर प्रदर्शन साबित करने का मौका
चंपावत और खटीमा मुख्यमंत्री की पसंदीदा सीट
देहरादून(उद ब्यूरो)। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने मौजूदा विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होकर प्रदर्शन साबित करने का मौका दिया है। फिलहाल विधायकों के टिकट पर कोई संकट नहीं माना जा रहा, लेकिन उनकी राजनीतिक परीक्षा शुरू हो चुकी है। पार्टी आने वाले महीनों में विधायकों की जनता के बीच पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रियता और सरकार की उपलब्धियों को घर-घर तक पहुंचाने की क्षमता का आकलन करेगी। स्थानीय स्तर पर असंतोष दूर करने की जिम्मेदारी भी विधायकों की होगी। वहीं बताया जा रहा है कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के चुनाव लड़ने के लिए कई अन्य विधानसभा सीटो पर भी मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों का दावा है कि इस बार सीएम धामी के लिए चम्पावत के साथ ही खटीमा से भी दांव खेला जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों से उन्हें चुनाव लड़ने के प्रस्ताव और आमंत्रण पत्र मिले हैं। अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने मुख्यमंत्री को प्रदेश की करीब 25 विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने का न्योता दिया है।इन प्रस्तावों के बीच भाजपा के भीतर चंपावत विधानसभा क्षेत्र को मुख्यमंत्री के लिए अधिक पसंदीदा सीट माना जा रहा है। इसके पीछे क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को प्रमुख वजह बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी वर्तमान में चंपावत से विधायक हैं। बीते वर्षों में यहां कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं शुरू हुई हैं, जिसके चलते चंपावत को विकास के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।हालांकि, मुख्यमंत्री आगामी विधानसभा चुनाव में किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसका अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के स्तर पर ही लिया जाएगा। दिल्ली में बीते दिन हुई उत्तराखंड भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख चर्चा उन विधानसभा सीटों को लेकर है, जहां पार्टी के आंतरिक सर्वे में मौजूदा भाजपा विधायक अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में बताए जा रहे हैं। ऐसे में इन विधायकों के टिकट पर भी संकट की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, भाजपा के वरिष्ठ नेता इन अटकलों से इत्तेफाक नहीं रखते। पार्टी नेताओं का कहना है कि दिल्ली में हुई कोर ग्रुप की बैठक का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने पर रहा। बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक तैयारियों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। दरअसल, पिछले कुछ समय से उत्तराखंड भाजपा संगठन में संभावित बड़े बदलाव को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा यह चर्चा भी जोर पकड़ रही थी कि पार्टी ने जिन विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक या राजनीतिक कमजोरी महसूस की है, वहां आगामी चुनाव से पहले विशेष रणनीति के तहत बदलाव किए जा सकते हैं। भाजपा ने फिलहाल मौजूदा विधायकों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने का संकेत दिया है। पार्टी की नजर विधायकों की जनता के बीच पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की क्षमता पर रहेगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनावी तैयारियों के दौरान जमीनी फीडबैक को महत्वपूर्ण माना जाएगा। ऐसे में जिन क्षेत्रों में संगठन कमजोर है या जहां विधायक जनता और कार्यकर्ताओं के बीच अपेक्षित पकड़ नहीं बना पा रहे हैं, वहां पार्टी आने वाले समय में स्थिति सुधारने के लिए रणनीति पर काम कर सकती है।हालांकि, इसे मौजूदा विधायकों के टिकट काटने के फैसले से जोड़ना अभी जल्दबाजी माना जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि चुनाव से पहले पार्टी का पूरा ध्यान संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां बेहतर करने पर है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि मौजूदा विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सक्रियता के साथ जनता और कार्यकर्ताओं के बीच रहना होगा। उन्होंने कहा कि सभी विधायक सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ स्थानीय समस्याओं के समाधान और संगठन को मजबूत करने पर जोर देंगे। पार्टी के लिए जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है। आगामी चुनाव की तैयारियों में जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी।
