October 17, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

उत्तराखंड नेपाल सीमा पर सक्रिय हैं ईसाई मिशनरियां: तराई में 35 फीसदी थारू बुक्सा आबादी ईसाई मिशनरियों के चंगुल में फंसी

ईसाई बन चुके थारू बुक्सा जनजाति की जमीनों पर भू माफिया तंत्र की नजर
प्रशासन ने धर्मान्तरण कानून को प्रभावी किया, जनजाति प्रमाण पत्र रद्द किए
खटीमा(उत्तराखंड)। राज्य के नेपाल सीमा से लगे खटीमा सितारगंज नानकमत्ता  क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों का मकड़ जाल सा बिछ गया है, मिशनरी से जुड़े कार्यकर्त्ता कांग्रेस से जुड़े बताये जा रहे और इनकी नजर थारू जनजाति की बेशकीमती जमीनों पर है जोकि नेपाल की तरफ जा रहे हाई वे से लगी हुई है। ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग थारू जनजाति के लोगो को ईसाई बना कर धर्म परिवर्तन करवा कर न सिर्फ उन्हे अल्पसंख्यक बना रहे है बल्कि उनकी जमीनो को हड़पन्ने की साजिश भी रच रहे हैँ.।जानकारी के मुताबिक खटीमा पुलिस के सामने ऐसी कई मामले सामने आये है जिसके बाद पुलिस ने जिला अदालत मे दान सिंह राणा और उसके साथियो के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।जानकारी के मुताबिक उत्तराखण्ड के तराई क्षेत्र मे ईसाई मिशनरियां न सिर्फ यही बसी महाराणा प्रताप के वंशज मानी जाती थारू बुक्सा जनजाति को ईसाई बना रही है बल्कि सिक्खों में भी धर्म परिवर्तन का काम करने में लगी है।उत्तराखंड जब यूपी का हिस्सा था तब से लेकर अब तक या कहें आजादी के कुछ समय बाद से ही ईसाई मिशनरियों ने अपना धर्मांतरण का कार्य कर रही है। चिकित्सा और शिक्षा के बहाने सेवा कार्य करने वाले मिशनरियो ने जनजाति क्षेत्रो में अपना काम पहले फैलाया।खास बात ये कि नेपाल से लगे इस सीमांत क्षेत्र में चर्च और मिशनरियां इस लिए सक्रिय हुई कि ये इलाका अत्यंत ही पिछड़ा हुआ था। थारू बुक्सा जोकि महाराणा वंशज कहलाती है,मुगलो के आतंक से यहां तराई के जंगलों में आकर छिपी थी,आजादी के बाद इन्हें यहां कानूनी रूप से बसा कर इन्हें जनजाति का दर्जा दिया गया और इन्हें नौकरियों में आरक्षण जैसी सुविधाएं भी दी गयी।चर्च ने यहीं से अपना खेल शुरू किया कि सरकारी पदों पर ईसाई कैसे काबिज हो,इसके लिए चर्च मिशनरियो ने यहां मिशनरी कान्वेंट स्कूल खोले और अच्छी शिक्षा के लिए जनजाति के बच्चो और उनके परिवारों को प्रलोभन देकर  ईसाई बनने का ताना बाना बुना और तब से ये खेल आजतक चला आरहा है।राणा वशंज जो कभी कट्टðर हिन्दू थे वो हिन्दू धर्म से ही विमुख होने लगे। विदेशों से मिशनरियो को मिलने वाले सहायता से धर्मांतरण का अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया जो अभी भी चल रहा है।थारू बुक्सा जनजाति की 35 प्रतिशत आबादी चर्च और पास्टर के चंगुल में फंस कर ईसाई बन चुकी है।केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से मिशनरियो के विदेशी मदद पर रोकथाम तो हुई लेकिन चर्च मिशनरी संचालित स्कूलों ने अपने यहां पढ़ने वाले सम्पन्न हिन्दू बच्चो की फीस में वृ(ि करके इस पैसे को धर्मांतरण में लगाने का रास्ता खोज लिया है।यानि हिन्दू सम्पन्न परिवारों के पैसों से ही अब धर्मांतरण होने लगा है।आश्रम ,संत जैसे शब्दों को इस्तेमाल करने वाले ईसाई प्रचारक भी अब भगवा वस्त्र धारण करते है,सिक्खों में काम करने वाले प्रचारक पादरी सिक्खों की वेशभूषा में बकायदा पगड़ी कृपाण धारक होकर राय सिक्खों में धर्मान्तरण का काम कर रहे है।पंजाब के बाद सबसे ज्यादा सिक्ख तराई में  बसते है और इनमें अनुसूचित जाति के राय सिक्ख है जिनको ईसाई बनाने का काम मिशनरियां कर रही है।चर्च की प्रार्थना सभाओं में पगड़ीधारी सिक्खों को देख कर हैरानी तब होती है जब सिक्खों के पवित्र तीर्थस्थल श्री नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारा यहां स्थापित है और सिक्ख कौम हमेशा गुरु घर के प्रति कट्टðर आस्था रखती आयी है।सितारगंज क्षेत्र में ईसाई मिशनरियों केसबसे बड़े धर्मांतरण केंद्र  अनुग्रह आश्रम में प्रत्येक रविवार को भक्ति पाठ के नाम पर  थारू समाज व राय सिक्ख समाज के अनेक लोग यहां फादर से फादर से अपनी परेशानियां जाहिर कर समाधान पाते हैं फादर इन्ही से ईसा मसीह का गुणगान करने से सब दुख दर्द  दूर होने की बात करते हैं। दूरदराज से आए लोग प्रत्येक रविवार को लगभग चार घंटे की प्रार्थना के बाद चर्च के फादर से भी मिलते हैं। फादर उनके आर्थिक रूप से कमजोर होने का फायदा उठाकर उन्हें धन, घरेलू समान इत्यादि उपलब्ध कराकर लुभाने का भी प्रयास करते हैं। ऐसे ही सितारगंज में खटीमा रोड स्थित अराधलय केंद्र में धर्मांतरण का खेल चलता है।बच्चों से लेकर बड़ो के लिए ऑनलाइन ईसा मसीह के वीडियो यहां से जारी किए जाते है ।इसमें आसपास के गांव थारू बाघोरी, पैरपुरा, पिंडारी, सजनी आदि गाव के थारू समाज के लोग प्रतिभाग करते हैं। ईसाइयत का प्रचार प्रसार करने के लिए ईसाई मिशनरी छोटे बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के नाम पर विभिन्न शिक्षण संस्थान भी चला रही हैं। जिनमें छोटे बच्चों को ईसा मसीह के जीवन परिचय के साथ-साथ बाइबल के बारे में भी जानकारी देते हैं। छोटे बच्चों को जरूरत का सामान जैसे कॉपी, किताब, पेन, पेंसिल खिलोने और अब ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल फोन तक भी मिशनरी शिक्षण संस्थानों से निशुल्क प्राप्त हो जाता है।बचपन से ही चर्च ईसा मसीह के किस्से सुन जब बच्चा बड़ा होकर उच्च शिक्षा में जाता है तो वो पूरी तरह से चर्च में रंग जाता है।खटीमा विधानसभा क्षेत्र नेपाल सीमा से लगा हुआ है यहां अमाउ चर्च मिशनरी खुलकर धर्मांतरण का काम करती है इनके वाहन  नेपाल में बेरोकटोक आते जाते देखे गए,नेपाल में माओवादी आंदोलन चला और उसी दौर में भारत के नेपाल सीमा से लगे  रंसाली कड़ापानी के जंगलों से माओवादी के कैम्प पुलिस ने पकड़ा हथियार बरामद हुए और  पकड़े गए माओवादी प्रशांत और उनके साथियों पर राजद्रोह का मामला भी दर्ज हुआ । ईसाई मिशनरियों के चर्च मोहम्मद पुर भुड़िया लोहियापुल, उमरकला, फुलईयां, मझोला पोलीगंज में सक्रिय है।इनका इतना बड़ा नेटवर्क स्थापित हो चुका है जिसकी कल्पना भी नही की जासकती। भारत और उत्तराखंड सरकार ने अभी तक कोई ऐसा ठोस कदम नही उठाया है जिससे इनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके। एडवोकेट अमित रस्तोगी कहते है कि थारू बुक्सा जनजाति दर्जा प्राप्त है और ये ईसाई बन जाने के बाद अल्पसंख्यक होने का भी फायदा उठाती आरही है जबकि उत्तराखंड में 2018 में लाये धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई अल्पसंख्यक बन जाता है तो उसे जनजाति श्रेणी की सुविधायों से वंचित किया जा सकता है।किंतु जो लोग ईसाई पहले से बन गए है वो दोनों श्रेणी में होने का फायदा उठा रहे है। प्रशासन अब इस मामले मे सख्त कदम उठा का फैसला लें चुकी हैँ.।खटीमा के पुलिस सीओ नीरज सेमवाल ने बताया की पिछले दिनों धर्मान्तरण कानून के तहत दान सिंह राणा सहित चार आरोपियों को जेल भेजा गया था उनकी बेल हो गयी है और ये लोग पुनः ऐसी गतिविधियों मे लगे है, पुलिस प्रशासन ने कोर्ट मे बेल निरस्त करने की अर्जी दी हैँ.। सीओ ने बताया कि कुछ भू माफिया, थारू जनजाति के भूमि की गैर कानूनी खरीद फरोख्त मे भी लगे हुए है इन्हे चिन्हित किया गया है। उधम सिंह नगर के एडीएम कौस्तोभ मिश्रा ने बताया की धर्म परिवर्तन के मामलें सामने आये है, जिन्होंने ऐसा किया है उन्हें नोटिस दें कर उनके जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जा रहे है।
‘‘देवभूमि उत्तराखण्ड का एक सांस्कृतिक स्वरूप है, नेपाल बॉर्डर है सीमान्त राज्य है यहॉँ धर्मान्तरण गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता, कुछ मिशनरी, ऐसी सनातन विरोधी कृत्य कर रही है, जिनके खिलाफ सख्त धर्मान्तरण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी., जिन्होंने धर्म परिवर्तन किया है उन्हे मिलने वाले जनजाति सुविधाओं को, आरक्षण को समाप्त किया जाएगा। – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *