September 16, 2026

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शासन-प्रशासन से निराश ‘ग्रामीणों’ ने स्वयं शुरू किया ‘सड़क निर्माण’

कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव के ग्रामीणों ने तंत्र को दिखाया आईना
चमोली। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार सड़क की मांग करने के बावजूद जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने खुद ही गेती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजार उठा लिए तथा अपने निजी संसाधनों और श्रमदान से गांव तक सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है। ज्ञात हो की कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव आज तक सड़क सुविधा से कोसों दूर है और ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से की जा रही सड़क निर्माण की मांग पूरी न होने पर ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया और ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी, सरस्वती देवी समेत अन्य ग्रामीण स्वयं ही सड़क निर्माण में जुट गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार सकंड गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वे लंबे समय से शासन-प्रशासन, जिलाधिकारी और विधायक समेत संबंधित अधिकारियों को पत्राचार करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बाद भी ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पैदल आवाजाही करनी पड़ती है। सबसे अधिक परेशानी बीमार, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती है। किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद ही वाहन के जरिए उसे कर्णप्रयाग तक ले जाना संभव हो पाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क सुविधा नहीं होने का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है। कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने, जरूरी सामान गांव तक लाने और आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कत होती है।सकंड गांव के ग्रामीणों द्वारा अपने संसाधनों से सड़क निर्माण किए जाने का मामला उनके संज्ञान में आया है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से मांग और पत्राचार के बावजूद जब सड़क नहीं बनी तो अब उन्होंने अपने स्तर से निर्माण शुरू करने का फैसला लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम सरकार और शासन- प्रशासन को आइना दिखाने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि जब ग्रामीण अपने सीमित संसाधनों से सड़क बनाने को मजबूर हो सकते हैं तो जिम्मेदार विभागों को भी गांव की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि सकंड गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए जल्द ठोस कार्रवाई की जाए और सड़क निर्माण को सरकारी स्तर पर स्वीकृति देकर कार्य शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए कई बार सर्वे किए गए, लेकिन इसके बावजूद सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। आज भी ग्रामीणों को करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि मांग को लेकर जनवरी में पांच और छह जनवरी को आंदोलन भी किया गया था और विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दो दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया था। ग्रामीणों के अनुसार विधायक ने तीन माह के भीतर सड़क का सर्वे कराने और जल्द सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव बहिष्कार की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन- प्रशासन की होगी। उधर ग्रामीणों द्वारा स्वयं सड़क का निर्माण आरंभ किए जाने पर कर्णप्रयाग के उप जिला अधिकारी अल्केश नौटियाल का कहना है कि जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क बना रहे हैं, वह वन भूमि के अंतर्गत आती है। मामले की जानकारी संबंधित विभागों को भी दी जा रही है।

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