एसआईआर में गड़बड़ी को लेकर ‘अलर्ट मोड’ में कांग्रेस
विशेष गहन पुनरीक्षण के साइड इफेक्ट से निपटने के लिए कांग्रेस ने स्थापित किया कंट्रोल रूम, प्रभावितों की सहायता हेतु तैनात की अट्टòारह अधिवक्ताओं की फौज
देहरादून। तकरीबन सत्तर लाख वोटर्स वाले उत्तराखंड में उन्नीस लाख से ज्यादा लोगों को एसआईआर का नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आने के बाद उत्तराखंड राज्य कांग्रेस एसआईआर में संभावित गड़बड़ी को लेकर अलर्ट मोड पर आ गई है और उसने अपने बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों को फिलहाल स्थगित करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर ही पूरा फोकस करने का निर्णय लिया है। सरकार निर्वाचन आयोग की सहायता से विशेष गहन परीक्षण अभियान में कोई बड़ा खेला ना कर दे, इस आशंका से ग्रस्त कांग्रेस पार्टी ने न केवल अपने महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है, बल्कि विधिवत एक कंट्रोल रूम तैयार कर वहां अधिवक्ताओं की एक बड़ी फौज भी बैठा दी है। इसके अतिरिक्त पार्टी ने राज्य में जारी एसआईआर अभियान पर सतर्क एवं नजदीकी नजर बनाए रखने के लिए के प्रदेश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं को अलर्ट रहने के निर्देश भी दे दिए गए हैं। बता दें कि उत्तराखंड में राज्य निर्वाचन आयोग इन दिनों विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर बड़े ही जोर शोर से काम कर रहा है। तमाम जिला निर्वाचन कार्यालय को भी इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाने के साथ-साथ इस काम के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों की डड्ढूटी भी लगा दी गई है, लेकिन इस पूरी कवायद के बीच विपक्षी दल कांग्रेस की कुछ आशंकाओं ने उसे अलर्ट मोड पर ला दिया है। कांग्रेस पार्टी के लिए यह आशंकाएं उन नोटिस से शुरू हुई है, जो बड़ी संख्या में प्रदेशवासियों को आयोग की तरफ से दिए जा रहे हैं। ज्ञात हो कि उत्तराखंड के लगभग 70 लाख वोटरों में से निर्वाचन आयोग ने 19 लाख से ज्यादा ऐसे लोग चिन्हित किए हैं, जिनके गणना प्रपत्र में कई खामियां हैं । राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा इतनी भारी संख्या में मतदाताओं को अपनी रडार पर लिए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी के कान खड़े हो गए हैं और उसने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान वोटर लिस्ट से संबंधित किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए अपने स्तर पर कमर कस ली है और उसने अपने तमाम कार्यक्रमों को स्थगित कर इसी को लेकर पर ही पूरा फोकस करने का फैसला लिया है। इसके लिए कांग्रेस ने एक कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया है। जहां करीब 18 अधिवक्ताओं की टीम लगाई गई है, जो कि एसआईआर पर कानूनी पहलुओं को देखेगी और आम लोगों को दिए जाने वाले नोटिस पर उनकी सहायता भी करेगी। इतना ही नहीं पार्टी अंदरुनी रूप से ये भी देखने की कोशिश कर रही है कि आिखरकार निर्वाचन आयोग ने जो नोटिस दिए हैं, वो किन क्षेत्रें के हैं और इसमें ज्यादातर किन लोगों को रखा गया है। कुल मिलाकर पार्टी आंतरिक रूप से नोटिस के पीछे के कारणों को जानने में लग गई है। वह इसलिए क्योंकि, पार्टी को आशंका है कि सरकार निर्वाचन आयोग के जरिए एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी कर सकती है।
