गुलदार के हमले में मासूम बच्ची की मौत: गुस्साए ग्रामीणों ने अधिकारियों को बनाया बंधक
पौड़ी (उद संवाददाता)। देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर खांडड्ढूसैंण के पास गुलदार के हमले में चार वर्षीय मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत के बाद क्षेत्र में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार शाम को क्षेत्र के विधायक का घेराव किया, जिसके बाद बुधवार को मौके पर पहुंचे पौड़ी तहसीलदार और वन विभाग के एसडीओ को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने दोनों अधिकारियों को एक दुकान के अंदर बंद कर अपना कड़ा रोष व्यक्त किया, जबकि मौके पर पहुंचे प्रभागीय वंशीय अधिकारी यानी डीएफओ के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। प्राप्त विवरण के अनुसार, मंगलवार शाम करीब छह बजे पौड़ी के खांडड्ढूसैंण में एक आदमखोर गुलदार ने चार साल की बच्ची आरुषि को अपना निवाला बना लिया। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से ही ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। घटना की सूचना मिलते ही मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। ग्रामीण विधायक की गाड़ी के ऊपर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। पुलिस बल लगातार ग्रामीणों को समझाइश देता रहा, लेकिन प्रदर्शन जारी रहा और विधायक को काफी देर तक अपनी कार के भीतर ही रहना पड़ा। इसके बाद रात करीब सवा दस बजे विधायक कार से बाहर आए और ग्रामीणों से वार्ता कर सुरक्षा के पुख्ता आश्वासन दिए, जिसके बाद उनका काफिला वहां से रवाना हो सका। यह आक्रोश बुधवार सुबह और अधिक उग्र हो गया, जब ग्रामीण सुबह आठ बजे से ही पौड़ी-देवप्रयाग मोटर मार्ग पर धरने पर बैठ गए और सड़क पूरी तरह जाम कर दी। सुबह नौ बजे तक मार्ग पर आवाजाही पूरी तरह ठप रही। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर पहुंचे पौड़ी के तहसीलदार राजेंद्र गोस्वामी और वन विभाग की एसडीओ आयशा बिष्ट को भी ग्रामीणों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते ग्रामीणों का रोष इस हद तक बढ़ गया कि सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे दोनों अधिकारियों को एक दुकान के भीतर बंद कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के डीएफओ महातिम यादव मौके पर पहुंचे, जहां डीएफओ के साथ भी ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। डीएफओ द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने और गुलदार को पकड़ने के पुख्ता आश्वासन दिए जाने के बाद, करीब आधे घंटे तक बंदी बनाए गए तहसीलदार और एसडीओ को ग्रामीणों ने मुक्त किया। इसके पश्चात डीएफओ और ग्रामीणों के बीच वार्ता का दौर शुरू हुआ, हालांकि सुबह से जारी मोटरमार्ग के जाम के चलते यातायात प्रभावित रहा। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ समय से क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों के हमले हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई ठोस सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं की जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ग्रामीण अपने घरों के आंगनों और आसपास के रास्तों पर भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और बच्चों को घरों से बाहर भेजने में डर लगने लगा है। इस संबंध में पौड़ी के डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि मंगलवार रात की घटना के तुरंत बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और आज भी एक टीम लगातार गश्त कर रही है। इलाके में सुरक्षा की दृष्टि से ट्रैप कैमरे और पिंजरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही एक शूटर टीम भी मौके पर तैनात है, जिसे गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने तथा आवश्यकता पड़ने पर अंतिम विकल्प के रूप में उसे नष्ट करने के शासन से आदेश प्राप्त हो चुके हैं।


