जनता के मुद्दों पर धाामी की ‘चौके-छक्कों’ वाली बैटिंग: युवा, जमीन, रोजगार और विकास पर बड़े फैसले
2027 से पहले बनबसा से बड़ा राजनीतिक संदेश
बनबसा। उत्तराखंड की सियासत में 2027 की पिच तैयार होने लगी है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा से अपनी सरकार की रणनीति का बड़ा संकेत दिया है। जनता की जरूरतों और क्षेत्रीय समस्याओं को फैसलों के केंद्र में रखते हुए धामी सरकार ने जिस तरह युवा रोजगार से लेकर जमीन के अधिकार और पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर कुमाऊं की कनेक्टिविटी तक को एक साथ साधा है उससे साफ है कि सरकार आने वाले चुनाव में अपने काम और फैसलों को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है। धामी की इस राजनीतिक पारी का अहम पहलू यह है कि उन्होंने कैबिनेट की बैठक देहरादून में करने के बजाय भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में की। चंपावत जिले में पहली बार हुई इस कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों पर मुहर लगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि आगे भी कैबिनेट की बैठकें प्रदेश के दूसरे जिलों में आयोजित की जाएंगी ताकि स्थानीय समस्याओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे सरकार के सामने लाया जा सके। राजधानी से निकलकर सरकार को जनता की चौखट तक ले जाने की यह कोशिश प्रशासनिक कदम के साथ राजनीतिक संदेश भी देती है। बनबसा में लिए गए फैसलों में सबसे बड़ा दांव युवाओं पर दिखाई देता है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में युवाओं के कौशल विकास पर 200 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना को मंजूरी दी है। करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को कौशल संवर्धन योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। एआई मशीन लर्निंग ड्रोन टेक्नोलॉजी सहित आधुनिक रोजगारपरक कौशल से युवाओं को जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उत्तराखंड में रोजगार और पलायन लंबे समय से बड़े राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। ऐसे में सरकार ने युवाओं के सामने केवल सरकारी नौकरी का विकल्प रखने के बजाय उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा निवेश किया है। 2027 के चुनाव से पहले युवा वर्ग के बीच सरकार के पास अपनी नीतियों और उपलब्धियों को रखने के लिए अब एक बड़ा पैकेज मौजूद है। धामी सरकार ने जमीन के सवाल को भी अपने एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया है। वर्ग-3 और वर्ग-4 की जमीन के पात्र पðेदारों और कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने से जुड़े फैसले का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है जो लंबे समय से भूमि अधिकार की समस्या से जूझ रहे हैं। जमीन का सवाल खासकर मैदानी उत्तराखंड में केवल संपत्ति का विषय नहीं बल्कि परिवार की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। कुमाऊं के लिए पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार का फैसला भी महत्वपूर्ण है। पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए 66.29 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि जारी करने को मंजूरी दी गई है। बेहतर एयर कनेक्टिविटी से उद्योग व्यापार पर्यटन और निवेश को गति मिलने की उम्मीद है। यानी यह फैसला केवल पंतनगर तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे कुमाऊं के आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने और चिकित्सकों को पहाड़ में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता लंबे समय से सरकार के सामने चुनौती रही है। ऐसे में आर्थिक प्रोत्साहन के जरिए डॉक्टरों को पर्वतीय क्षेत्रों में रोकने की कोशिश की गई है। कैबिनेट में 1873 के पुराने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम को निरस्त कर उसकी जगह उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकास विधेयक 2026 लाने की मंजूरी भी दी गई। इसके अलावा निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में बदलाव राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन और राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को विधानसभा में रखने जैसे फैसले भी हुए। इन सभी फैसलों को एक साथ देखा जाए तो बनबसा कैबिनेट में सरकार ने उत्तराखंड के अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को साधने की कोशिश की है। युवाओं के लिए कौशल विकास है। जमीन से जुड़े परिवारों के लिए भूमिधरी अधिकार है। कुमाऊं के लिए एयर कनेक्टिविटी है। पहाड़ के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का प्रयास है और सीमांत क्षेत्र के लिए विकास का संदेश है। यही बनबसा कैबिनेट का राजनीतिक पक्ष है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के सामने अपने काम को जनता के बीच ले जाने की चुनौती है। इन फैसलों के जरिए सरकार के पास विकास और जनसमस्याओं के समाधान का अपना एजेंडा जनता के सामने रखने का आधार तैयार हुआ है। हालांकि चुनावी राजनीति में असली परीक्षा घोषणाओं की नहीं बल्कि उनके क्रियान्वयन की होगी। 200 करोड़ की कौशल योजना कितने युवाओं को रोजगार से जोड़ती है। भूमिधरी अधिकार का लाभ कितने परिवारों को मिलता है। पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तार कितनी तेजी से आगे बढ़ता है और पहाड़ों में डॉक्टरों की उपलब्धता कितनी सुधरती है। आने वाले समय में इन्हीं सवालों पर सरकार के कामकाज का आकलन होगा। फिलहाल बनबसा से धामी सरकार ने अपनी दिशा स्पष्ट कर दी है। युवा रोजगार जमीन स्वास्थ्य कनेक्टिविटी और सीमांत विकास को एक साथ जोड़कर सरकार ने जनता से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। 2027 की चुनावी पिच पर अभी मुकाबला लंबा है लेकिन धामी सरकार ने अपनी ओर से विकास के मुद्दों को आगे रखते हुए बल्लेबाजी शुरू कर दी है।

