आदि रंगोत्सव से थारू समाज के दिलों में छा गए सीएम धामी
थारू संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देकर धामी ने उठाया ऐतिहासिक कदम, जनजातीय समाज में बनाई अनूठी पहचान
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने गृह क्षेत्र खटीमा में आदि रंगोत्सव का भव्य आयोजन कर थारू समाज की संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन हुए भव्य आगाज में 18 राज्यों की जनजातीय संस्कृति एक मंच पर नजर आई। मुख्यमंत्री खुद कलाकारों के बीच पहुंचे और ढोल बजाकर उनके साथ थिरके। संस्कृति के सम्मान के साथ जनजातीय समाज के बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं से जुड़ी घोषणाओं ने आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया। मुख्यमंत्री की सक्रिय भागीदारी ने थारू समाज के बीच उनके जुड़ाव की तस्वीर को भी मजबूत किया। खटीमा में पहली बार देहरादून से बाहर आयोजित आदि रंगोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने लोक संस्कृति लोकनृत्य लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की प्रस्तुतियां दीं। आयोजन के जरिए जनजातीय परंपराओं और संस्कृति को व्यापक मंच देने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा की धरती से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत को देश के सामने रखने का अवसर उपलब्ध कराया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की सक्रिय मौजूदगी खास आकर्षण रही। धामी केवल मंचीय संबोधन तक सीमित नहीं रहे बल्कि कलाकारों के बीच पहुंचे। उन्होंने ढोल बजाया और कलाकारों के साथ कदम मिलाया। जनजातीय संस्कृति के रंग में मुख्यमंत्री की यह भागीदारी स्थानीय समाज के साथ उनके सहज जुड़ाव की तस्वीर के रूप में सामने आई। आदि रंगोत्सव का महत्वपूर्ण पक्ष संस्कृति के साथ शिक्षा और विकास को जोड़ना रहा। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने खटीमा के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की घोषणा की। करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छात्रवास का टेंडर पूरा होने की जानकारी भी दी गई। इससे जनजातीय समाज के बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक और आवासीय सुविधाओं के विकास की दिशा में कदम आगे बढ़ा है। मुख्यमंत्री धामी ने जनजातीय समाज के विकास को संस्कृति तक सीमित न रखते हुए शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने पिथौरागढ़ में भी एकलव्य आवासीय विद्यालय स्थापित करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया। इससे जनजातीय समाज की नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने पर सरकार के जोर का संकेत मिलता है। आदि रंगोत्सव में हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी मंच मिला। विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों ने अपने पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए। इससे जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ स्थानीय कला और उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं भी सामने आईं। संस्कृति के साथ कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का यह पहलू आयोजन को और व्यापक बनाता है। कार्यक्रम से पहले खटीमा में निकले रोड शो में भी जनजातीय संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार ढोल-दमाऊ और लोकनृत्य के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में शहर का माहौल जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। आयोजन में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व दिया। दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने जनजातीय समाज से जुड़े विकास प्रयासों और आयोजन के उद्देश्यों की सराहना की। इससे खटीमा में आयोजित आदि रंगोत्सव को व्यापक स्तर पर पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में फिल्म ‘हनुमान अंश’ के कलाकारों को भगवान हनुमान की गदा और नीम करौली बाबा की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया। इससे आयोजन में जनजातीय संस्कृति के साथ उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की झलक भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री धामी का गृह क्षेत्र खटीमा थारू समाज की महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक उपस्थिति वाला क्षेत्र है। ऐसे में इसी धरती पर देशभर की जनजातीय संस्कृति को एक मंच देना और मुख्यमंत्री का स्वयं कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करना महत्वपूर्ण है। संस्कृति, शिक्षा और विकास को एक साथ केंद्र में लाने वाली मुख्यमंत्री श्री धामी की इस पहल ने थारू समाज का दिल जीत लिया। धामी की इस पहल का अहम पक्ष यह रहा कि थारू समाज की संस्कृति को केवल उत्सव तक सीमित नहीं रखा गया। परंपराओं को राष्ट्रीय मंच मिला। जनजातीय बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं से जुड़ी घोषणाएं हुईं। कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को मंच मिला और मुख्यमंत्री स्वयं कलाकारों के बीच पहुंचकर सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हुए। खटीमा में आदि रंगोत्सव के बहाने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थारू समाज के साथ अपने जुड़ाव की एक अलग तस्वीर पेश की है। संस्कृति के सम्मान से लेकर शिक्षा और विकास तक कई पहलुओं को एक मंच पर लाकर उन्होंने जनजातीय समाज के बीच अपनी सक्रिय मौजूदगी दर्ज कराई है। यही आदि रंगोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर रही कि थारू संस्कृति के रंगों के बीच मुख्यमंत्री धामी खुद भी उसी रंग में रंगे नजर आए।


