चुनाव आयोग विवाद पर प्रियंका गांधी का हमला, मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग विवाद और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ है।प्रियंका गांधी ने कहा कि “चुनावी प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने वाला कोई भी व्यक्ति राष्ट्र के साथ देशद्रोह कर रहा है।” उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसे लोकतंत्र, संविधान तथा देश के खिलाफ आपराधिक कृत्य बताया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। प्रियंका गांधी के अनुसार, आयोग के अन्य अधिकारियों ने कथित अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि कोई चुनाव अधिकारी जानबूझकर अनुचित चुनाव होने देता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए और उसे देशद्रोह के लिए मुकदमे का सामना करना चाहिए।
क्या है विवाद की पृष्ठभूमि?
प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी 23 सितंबर 2026 को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम-से-कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और चुनावी डेटा तक पहुंच सहित SIR से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाला बहुसदस्यीय निकाय है और आंतरिक टिप्पणियां या मतभेद निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। आयोग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और उसकी कार्रवाई कानून तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप रही है।
