August 22, 2026

Uttaranchal Darpan

Hindi Newsportal

पूर्व भाजपा विधायक शेर सिंह गड़िया के बयान से सियासी हलचल : तीन बार कटा टिकट, 2027 में फिर ठोकेंगे दावेदारी !

बोले- पार्टी में हो रही उपेक्षा,‘जनभावनाओं के अनुरूप होना चाहिए विकास’ कपकोट के सभी विधायकों के कार्यकाल की हो जवाबदेही
बागेश्वर(रिपोर्ट ब्यरो)।
उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक दलों में दावेदारी को लेकर हलचल बढ़ रही है। इसी क्रम में कपकोट विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक शेर सिंह गड़िया का बयान इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। गड़िया ने पार्टी में अपनी उपेक्षा का दर्द जाहिर करते हुए कहा कि उनका तीन बार टिकट काटा गया, बावजूद इसके उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।पूर्व विधायक ने कहा कि वह लंबे समय से भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में क्षेत्र और समाज की सेवा करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए उन्होंने करीब दो दशक तक पूरी निष्ठा के साथ काम किया है। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित राजनीतिक अवसर नहीं मिल पाए।गड़िया ने कहा, “मैं भाजपा के प्रति समर्पित होकर दो दशक से समाज सेवा में जुटा हूं। तीन बार मेरा टिकट काटा गया, लेकिन मैंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा। वर्ष 2022 में जब मेरा स्वास्थ्य खराब हुआ, तब भी पार्टी के किसी बड़े नेता ने मेरी सुध नहीं ली। यह बात निश्चित तौर पर मेरे लिए पीड़ादायक रही।”उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए केवल चुनाव लड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का जरिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर कपकोट विधानसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी प्रस्तुत करेंगे। पूर्व विधायक ने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं है, लेकिन व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कारण विकास की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “सरकार विकास कार्यों के लिए भरपूर बजट दे रही है, लेकिन सिस्टम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। विकास का मॉडल टनकपुर तक बह गया है। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में जनभावनाओं और जरूरतों के अनुरूप विकास होना चाहिए।”गड़िया ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों की परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग हैं। यहां सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार जैसे मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ काम किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए गड़िया ने कहा कि वह इस बार भी पार्टी के सामने अपनी दावेदारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य क्षेत्र की जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना और उनकी समस्याओं को उठाना है।उनके बयान से यह भी संकेत मिल रहा है कि कपकोट विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव में भाजपा के भीतर दावेदारी को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच पूर्व विधायक की सक्रियता ने पार्टी के अंदर टिकट को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है। हालांकि, गड़िया ने अभी किसी वैकल्पिक राजनीतिक कदम की स्पष्ट घोषणा नहीं की है, लेकिन उनकी नाराजगी और टिकट को लेकर खुलकर सामने आए बयान ने सियासी चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि भाजपा नेतृत्व उनकी दावेदारी को किस तरह देखता है और 2027 के चुनाव में कपकोट सीट पर पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है। फिलहाल, शेर सिंह गड़िया के “तीन बार टिकट कटने” और पार्टी में उपेक्षा के आरोप ने उत्तराखंड भाजपा की अंदरूनी राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। आने वाले समय में गड़िया की सक्रियता और उनके अगले राजनीतिक कदम कपकोट की चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

विकास कार्यों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई
कपकोट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच गढ़िया ने अपने कार्यकाल और मौजूदा विधायक सुरेश गढ़िया के कार्यकाल की तुलना करते हुए विकास कार्यों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया ने कहा कि उनके करीब दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों और उनकी कार्यशैली ने उन्हें क्षेत्र की जनता के बीच अलग पहचान दिलाई। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई और बिरादरी के सर्वमान्य एवं सम्मानित नेता के रूप में पहचान स्थापित की।उन्होंने मौजूदा विधायक सुरेश गढ़िया पर निशाना साधते हुए कहा कि करीब साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल के बावजूद वह उनकी कार्यशैली और जनस्वीकार्यता के आसपास भी नहीं पहुंच पाए हैं। शेर सिंह गढ़िया ने कहा कि कपकोट विधानसभा क्षेत्र से अब तक निर्वाचित सभी विधायकों के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि किस विधायक के कार्यकाल में कितने विकास कार्य स्वीकृत हुए, कितना बजट आया और उसका कितना प्रभाव जमीन पर दिखाई दिया।उन्होंने सभी कपकोट विधायकों के कार्यकाल की जवाबदेही तय करने और खुली बहस (ओपन डिबेट) कराने की मांग की। गढ़िया के मुताबिक ऐसी बहस से जनता के सामने विकास कार्यों और राजनीतिक दावों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *