पीपलकोटी टनल हादसा: धामी ने संभाली रेस्क्यू की कमान,बिहार-झारखंड के अधिकतर मजदूर
चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टीआरटी (टेल रेस टनल) में हुए हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे सुरंग में सरिया वेल्डिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन के बाद पानी, पत्थर और भारी मलबा तेजी से टनल के भीतर घुस गया। इसकी चपेट में कई श्रमिक आ गए। बताया जा रहा है कि हादसे के समय टनल के भीतर करीब 22 श्रमिक मौजूद थे। अचानक पानी और मलबा आने से श्रमिकों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग सुरंग के भीतर फंस गए। टनल में गले तक पानी और मलबा भर जाने के कारण रेस्क्यू अभियान में भी काफी मुश्किलें आ रही हैं।

छह श्रमिकों की तलाश जारी
हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, प्रशासन, आईटीबीपी, सेना और अन्य बचाव दलों ने तत्काल मोर्चा संभाला। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों के साथ टनल के भीतर दाखिल हुईं। पानी और मलबे के बीच आगे बढ़ने के लिए नीले रंग के ड्रमों का भी इस्तेमाल किया गया। रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों को गोपेश्वर के जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अलसुबह तक कुल 19 श्रमिकों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें सात की मौत हो चुकी थी, जबकि 12 घायल श्रमिकों का उपचार चल रहा था। बाद में एक श्रमिक की हालत अस्थिर होने पर उसे श्रीनगर स्थित बेस अस्पताल रेफर किया गया। फिलहाल टनल में फंसे छह श्रमिकों की तलाश जारी है। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार, लापता श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है। पानी अधिक होने के कारण बचाव अभियान में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।
बिहार और झारखंड के हैं अधिकतर श्रमिक
हादसे में मारे गए और घायल श्रमिकों में अधिकतर बिहार और झारखंड के बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बातचीत कर हादसे और चल रहे राहत एवं बचाव अभियान की जानकारी दी। उन्होंने दोनों राज्यों को हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिया।मुख्यमंत्री धामी लगातार अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं और पीपलकोटी में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
मौके पर पहुंचे प्रभारी मंत्री और डीएम
जिले के प्रभारी कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी भी रात में ही घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से रेस्क्यू अभियान की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने भी टनल के दूसरे हिस्से में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था और बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए।
प्रोजेक्ट प्रबंधन ने जांच का दिया भरोसा
परियोजना निदेशक शरद कुमार ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। उन्होंने कहा कि सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना परियोजना प्रबंधन की पहली प्राथमिकता है। राहत और बचाव कार्य के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता दी जाएगी और हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी। प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने तक रेस्क्यू अभियान जारी रहेगा।
