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पलायन से जीता,पर सिस्टम से हारा ‘समण गांव’ एक शिक्षक के कंधों पर पूरे स्कूल के शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी

समण गांव का एकमात्र राजकीय जूनियर इंटर कॉलेज सिस्टम की उपेक्षा का शिकार
टिहरी। उत्तराखंड स्कूल चले हम एवं डिजिटल इंडिया जैसे लुभावने नारों के बीच उत्तराखंड में एक ऐसे सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर सामने आई है, जहां समूचे स्कूल के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल एक ही शिक्षक के कंधों पर है। इतना ही नहीं विद्यालय में तैनात उपरोक्त शिक्षक को छात्र-छात्राओं को पढ़ने के साथ ही स्कूल के अन्य सरकारी कार्य भी निपटाने पड़ते हैं, जिसकी चलते विद्यालय में पढ़ने वाले 73 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है। जी हां, हम जिक्र कर रहे हैं, टिहरी गढ़वाल जिले के भिलंगना ब्लॉक के समण गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की, जो कि शिक्षकों के अभाव के बावजूद भी अभी तक देश को 38 से ज्यादा सैनिक दे चुका है। दरअसल, वर्तमान समय में इस स्कूल में क्लास 6वीं से 8वीं तक 73 बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन उनको पढ़ाने के लिए केवल एक ही शिक्षक की तैनाती की जा सकी है, जबकि उपरोक्त विद्यालय में चार शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। उल्लेखनीय है कि टिहरी जिले का समण गांव, पूरे उत्तराखंड में खास गौरवशाली पहचान रखता है। करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गांव आज भी उत्तराखंड के सबसे बड़े अभिशाप, पलायन से अछूता है,लेकिन पलायन जैसे अभिशाप को पराजित करने वाला यह गांव कहीं ना कहीं सिस्टम से हार गया जान पड़ता है।वर्तमान समय में इस गांव के 38 से ज्यादा युवा भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना में देश की सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा चार फौजी देश की सेवा कर सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं और कई अन्य युवा अन्य सरकारी विभागों में उच्च पदों पर आसीन हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी जांबाजों और अधिकारियों की प्राथमिक शिक्षा इसी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई है। इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि देश सेवा से लिए तीन दर्जन से अधिक जवान देने वाला यह स्कूल आज छात्रों की नहीं, बल्कि शिक्षकों की राह देख रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि टीचर न होने के बाद भी इस स्कूल में छात्र संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार की ओर से अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। केवल एक टीचर जोत सिंह चौहान यहां 8 सालों से तैनात हैं और पिछले दो सालों से वह अकेले ही स्कूल का बोझ उठा रहे हैं। उन्हीं को सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।समण गांव की ग्राम प्रधान कृष्णा देवी, का कहना है कि भिलंगना ब्लॉक में यह एकमात्र जूनियर हाईस्कूल है, जहां पर बीते कई सालों से शिक्षकों की खासी कमी है। समण गांव की ग्राम प्रधान कृष्णा देवी आगे बताती हैं कि समण गांव की आबादी लगभग दो हजार है। यह गांव आज भी पलायन से लगभग अछूता है। गांव के प्राथमिक विद्यालय में 92 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। करीब 300 बच्चे राजकीय इंटर कॉलेज धोपड़धार में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कई बार शासन और प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। गांव के विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती न होने के कारण ग्रामीणों में काफी आक्रोश है ग्रामीणों के अनुसार उनके द्वारा तीन महीने पहले मार्च में ही शिक्षा निदेशालय देहरादून में शिक्षा सचिव को पत्र दिया था ,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। विद्यालय के एकमात्र शिक्षक जोत सिंह चौहान के अनुसार यह स्कूल अति दुर्गम क्षेत्र में है। मैं यहां पिछले 8 सालों से कार्यरत हूं तथा पिछले 2 वर्षों से अकेले यहां पर बच्चों को पढ़ा रहा हूं। पढ़ाई के साथ-साथ अनेकों सरकारी कार्य भी निपटाने पड़ते हैं। जब मैं यहां आया था तो तब इस विद्यालय में 42 बच्चे थे। आज 73 हैं। दो सालों से मैं अकेला संभाल रहा हूं, यहां पर पर्याप्त बच्चों के साथ-साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई में काफी दिक्कतें आ रही हैं।जोत सिंह आगे बताते हैं कि, स्कूल में किसी प्रकार की कमी नहीं है। हर तरह का इंÚास्टक्चर यहां मौजूद है। यहां तक कि स्कूल में स्मार्ट बोर्ड भी लगे हैं। प्रोजेक्टर हैं, गेम्स की वस्तुए हैं। भौतिक स्थिति में स्कूल काफी आगे है, कमी शैक्षणिक स्तर पर है। इसके बाद स्कूल के बच्चे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल की एक छात्रा ने मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन स्कॉलरशिप प्राप्त की है।

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